scorecardresearch

अस्पताल की मेडिकल सर्विस शानदार, लेकिन खाना घटिया.. बच्चों के लिए खाने पर खर्चे 20 हजार

लंदन के एक बड़े अस्पताल से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने अस्पतालों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Advertisement
 hospital hospital

जब कोई बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है. ऐसे समय में माता-पिता न सिर्फ इलाज को लेकर चिंतित होते हैं, बल्कि बच्चे के खाने-पीने और देखभाल को लेकर भी परेशान रहते हैं. अस्पतालों से उम्मीद की जाती है कि वे बेहतर इलाज के साथ-साथ साफ और पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराएं, ताकि मरीज जल्दी ठीक हो सके. लेकिन लंदन के एक बड़े अस्पताल से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने अस्पतालों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

लंदन की रहने वाली 27 वर्षीय पैज कैमरन ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में परोसा गया खराब भोजन उनके बीमार बच्चों के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं था. इस वजह से उन्हें अपने अस्पताल में भर्ती बच्चों के लिए बाहर से खाना मंगवाना पड़ा, जिस पर हर दिन हजारों रुपये खर्च हुए. दरअसल, पैज कैमरन की दो साल की जुड़वां बेटियां ईव और ईडन पिछले सप्ताह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं. दोनों को रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (RSV) संक्रमण हो गया था, जो छोटे बच्चों के लिए खतरनाक माना जाता है. हालत बिगड़ने पर दोनों बच्चियों को सेंट मैरी अस्पताल, पैडिंगटन (सेंट्रल लंदन) में भर्ती कराया गया, जहां उनका छह दिनों तक इलाज चला.

अस्पताल में परोसा गया कच्चा खाना
कैमरन का कहना है कि डॉक्टरों और नर्सों की मेडिकल देखभाल संतोषजनक थी, लेकिन अस्पताल की ओर से दिया गया खाना बेहद खराब था. उन्होंने आरोप लगाया कि एक दिन उनके बच्चों को खाने में दो बेहद फीके रंग की सॉसेज और थोड़े से चिप्स दिए गए. कैमरन के मुताबिक सॉसेज इतने सफेद और कच्चे जैसे लग रहे थे कि उन्हें लगा वे ठीक से पके ही नहीं हैं.

कैमरन ने कहा, 'मुझे लगा कि सॉसेज कच्चे हैं. मैं समझ नहीं पाई कि दो साल के बीमार बच्चे के लिए ऐसा खाना कैसे सही हो सकता है.' उनका आरोप है कि अगले दिन स्थिति और भी खराब हो गई, जब बच्चों को कॉटेज पाई परोसी गई. उनके मुताबिक यह डिश इतनी पानीदार और बेस्वाद लग रही थी कि वह कॉटेज सूप जैसी दिख रही थी. बच्चों की तबीयत पहले से ही खराब थी, ऐसे में कैमरन ने उन्हें वह खाना खिलाना ठीक नहीं समझा.

20 हजार रुपये का खाना का किया ऑर्डर
इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स और आसपास के फास्ट-फूड आउटलेट्स से बच्चों के लिए खाना मंगवाना शुरू कर दिया. छह दिनों तक कैमरन ने करीब 180 पाउंड (लगभग 20 हजार रुपये) सिर्फ बाहर के खाने पर खर्च किए.कैमरन का कहना है, 'जब बच्चा बीमार होता है, तो माता-पिता के लिए सबसे मुश्किल समय होता है. ऐसे में किसी को यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि बच्चे को खाने के लिए सुरक्षित और ठीक भोजन कहां से मिलेगा. हर किसी के पास रोज-रोज बाहर से खाना मंगवाने की आर्थिक क्षमता नहीं होती, खासकर अगर अस्पताल में रुकना लंबा हो.'

कैमरन ने जब अस्पताल में दिए गए खाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं, तो वे तेजी से वायरल हो गईं. इन पोस्ट्स को चार लाख से ज्यादा बार देखा गया और इस पर तीखी बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने अस्पताल के खाने की आलोचना की. हालांकि कुछ लोगों ने कैमरन पर यह कहते हुए निशाना भी साधा कि ब्रिटेन में एनएचएस के तहत इलाज मुक्त होता है और उन्हें आभारी होना चाहिए.

ये भी पढ़ें: