Bhotekoshi River (Photo: PTI)
Bhotekoshi River (Photo: PTI)
Nepal Flash Flood in Bhotekoshi River: नेपाल के लोगों के लिए बुधवार का दिन किसी कयामत से कम नहीं रहा. भोटेकोशी नदी काल बनकर उतरी और देखते ही देखते अपने रास्ते में पड़ने वाले गांव के गांव और बड़ी आबादी निगल ली. भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और बड़े खतरे ने चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, रसुवागढ़ी नाका से करीब 18 किलोमीटर चीन की ओर ल्हेन्दे खोला का बहाव रुकने से एक बड़ा ताल बन गया है. इसके कारण भोटेकोशी नदी में फिर से बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है. सेटेलाइट इमेज से यह अनुमान लगाया गया है कि करीब 11 हेक्टेयर क्षेत्र में बने इस ताल में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है. सरकार ने किसी भी समय ताल फटने और बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने का आग्रह किया है.
ताल को फटने का खतरा
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के भूगर्भविद प्रकाश पोखरेल के अनुसार, ल्हेन्दे खोला का बहाव रुकने के कारण ताल बना है और इससे खतरा बना हुआ है. उन्होंने कहा, बुधवार को हिमचट्टान गिरने से भोटेकोशी में बाढ़ आई थी. उसी हिमपहिरो के मलबे से रास्ता अवरुद्ध होने के बाद ताल बना है. पोखरेल के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर किए गए प्रारंभिक अध्ययन में ल्हेन्दे खोला का बहाव रुकने और ताल बनने की पुष्टि हुई है. ताल लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. यदि पानी का निकास नहीं हुआ और ताल का आकार बढ़ता रहा तो इसके फटने का खतरा है. ताल फटने पर फिर से बड़ी बाढ़ आ सकती है.सैटेलाइट विश्लेषण में ताल का सतही क्षेत्रफल 11 हेक्टेयर पाया गया है. हालांकि इसकी गहराई अभी निर्धारित नहीं की जा सकी है.
सतर्क रहने की जरूरत
ग्लोबल टाइम्स ने ताल में करीब 20 लाख घनमीटर पानी जमा होने और वहां से पानी निकलना शुरू होने की जानकारी दी है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय को उद्धृत करते हुए प्रकाशित रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगले तीन दिनों में ताल में अतिरिक्त 30 लाख घनमीटर पानी जमा हो सकता है और ताल फटने का खतरा है. जलविज्ञान तथा जलस्रोत अनुसंधान केंद्र के बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा प्रमुख विनोद पराजुली ने कहा कि बुधवार जैसी स्थिति का खतरा भले ही नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है. उनके अनुसार, चीन से मिली जानकारी में 30 लाख घनमीटर पानी होने की बात कही गई है, जो बुधवार की तुलना में काफी कम है. उन्होंने बताया कि बुधवार की बाढ़ के दौरान देवघाट केंद्र पर पानी का प्रवाह प्रति सेकेंड अतिरिक्त दो करोड़ घनमीटर बढ़ गया था, जबकि बाढ़ से पहले पानी का बहाव सात करोड़ घनमीटर था. इसलिए बुधवार जैसी गंभीर स्थिति का खतरा नहीं है, लेकिन क्षेत्र में मलबा और अन्य अवशेष होने के कारण सावधानी जरूरी है.
समय पर सूचना क्यों नहीं मिली, उठे सवाल
बुधवार की बाढ़ के बाद दो गंभीर सवाल उठे हैं. पहला सवाल- चीन ने समय पर सूचना क्यों नहीं दी? दूसरा सवाल- बाढ़ आने के दौरान नेपाल के जलमापन केंद्रों से समय पर सूचना क्यों नहीं मिल सकी? नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा कि चीन की ओर तीन लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने के कारण समय पर सूचना नहीं देने की शिकायत गलत है. नेपाल के जलमापन केंद्रों से समय पर सूचना क्यों नहीं मिल सकी, इस पर बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के प्रमुख विनोद पराजुली ने बताया कि हिमाली क्षेत्रों में मुख्य समस्या पूर्व चेतावनी प्रणाली की है. उन्होंने कहा कि यह बाढ़ फ्लैश फ्लड थी, जो हिमताल या हिमपहिरो के अचानक फटने से आती है. नदी में मौजूद जलमापन केंद्र पानी का स्तर मापते हैं और उसके आधार पर बाढ़ की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है लेकिन बुधवार की बाढ़ अचानक आई और एक ही झटके में भारी नुकसान कर गई. पराजुली ने कहा कि हिमाली क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड का पूर्वानुमान लगाना आसान नहीं है. उन्होंने कहा, चीन जैसे विकसित देश के लिए भी ऐसा पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं हो सका है तो हम कैसे कर सकते हैं? लेकिन इन घटनाओं से हमें सीखना चाहिए.