Flash Flood
Flash Flood
मौसम जब बिगड़ता है तो इसका भयंकर असर पहाड़ों पर अधिक देखने को मिलता है. नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार को अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. फ्लैश फ्लड के कारण हजारों लोग लापता हैं. भारत के भी कई लोग लापता हैं. नेपाल में आई इस प्रलय के बाद बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. राहत और बचाव का कार्य जारी है. आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर फ्लैश फ्लड क्या होती है और नेपाल में इसके आने के पीछे की वजह क्या है?
क्या होती है फ्लैश फ्लड
फ्लैश फ्लड का मतलब होता है बहुत ही कम समय में अचानक से आने वाली तेज बाढ़. फ्लैश फ्लड के दौरान नदी-नालों और अन्य जलाशयों का पानी अचानक इतना बढ़ जाता है कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह जाने तक के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता है. पानी का तेज और भारी प्रवाह सबकुछ डुबो देता है. सामान्य बाढ़ में जहां नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, वहीं फ्लैश फ्लड में अचानक से नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है. कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों के भीतर नदियां उफान मारने लगती हैं.
फ्लैश फ्लड में पानी का बहाव इतना तेज होता है कि लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिलता है. पहाड़ों में फ्लैश फ्लड का तांडव अधिक देखने को मिलता है. पहाड़ों पर फ्लैश फ्लड होने से अचानक आई बाढ़ के साथ बर्फ-पानी और चट्टानों का सैलाब आता है और अपने मार्ग में आने वाली सड़कें, पुल, पेड़, गाड़ियां, घर और दूसरी संरचनाएं तक को तबाह कर देता है. फ्लैश फ्लड के दौरान पानी की रफ्तार इतनी तेज होती है कि पहाड़ों के नीचे रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगह जाने तक का मौका नहीं मिलता है.
फ्लैश फ्लड आने की मुख्य वजहें
फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ के लिए कई वजहें होती हैं. किसी जगह पर जब बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश (बादल फटने) हो जाती है और पानी को बहने या जमीन में रिसने का मौका नहीं मिलता और ऐसे में फ्लैश फ्लड की स्थिति बन जाती है. हिमालयी क्षेत्र में फ्लैश फ्लड भूकंप के चलते भी आती है. इस क्षेत्र में ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ, ग्लेशियर और चट्टान मौजूद हैं. भूकंप के जब तेज झटके आते हैं तो पहाड़ की चट्टानें और बर्फ खिसक सकती हैं. यदि भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मिट्टी अचानक नीचे गिरने लगे तो इसे हिमस्खलन कहा जाता है लेकिन यही मलबा किसी नदी या झील में गिर जाए तो इसके बाद फ्लैश फ्लड की खतरनाक स्थिति बन जाती है. हिमालयी क्षेत्र में फ्लैश फ्लड का एक और कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर झील का अचानक टूटना हो सकता है.
नेपाल में फ्लैश फ्लड आने के पीछे की क्या है वजह
नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के पीछे ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरना बताया जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है कि ग्लेशियर का निचला हिस्सा करीब 5200 मीटर की ऊंचाई से टूटकर लगभग 1200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा. ऐसा होने के बाद बर्फ, चट्टान और भारी मलबे का विशाल सैलाब आया.
इसी के चलते नदी में अचानक पानी, मलबे और बोल्डर का जबरदस्त बहाव पैदा हुआ और नेपाल के रसुवा इलाके में विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ गई. आपको मालूम हो कि 26 अगस्त 2026 को फ्लैश फ्लड की घटना के बाद शुरुआती तौर पर भूकंप को इसकी वजह माना गया. हालांकि, बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण एजेंसी USGS ने कहा कि जिस भूकंपीय गतिविधि को भूकंप समझा गया, वह ग्लेशियर, चट्टानों और बर्फ के टूटकर नीचे गिरने और मलबे के तेज बहाव से पैदा हुई सेसिमिक एनर्जी भी हो सकती है.
नेपाल में क्यों बाढ़ ने मचाई इतनी भारी तबाही
नेपाल में अक्सर बाढ़ से भारी तबाही मचती है. बाढ़ लिए जिम्मेदार वहां की भौगोलिक स्थिति है. आपको मालूम हो कि नेपाल का बड़ा हिस्सा पहाड़ों और हिमालयी क्षेत्र में स्थित है. नेपाल में ऊंची-ऊंची पर्वत चोटियां और उनके बीच संकरी लेकिन गहरी नदी घाटियां मौजूद हैं. नेपाल की यह भौगोलिक बनावट पानी के लिए प्राकृतिक फनल की तरह काम करती है.
मूसलाधार बारिश के बाद या बर्फ के पिघलने पर जब अचानक बहुत ज्यादा पानी नदियों में आता है तो उसे फैलने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती. नदियां अपनी सीमाओं को तोड़कर विकराल रूप ले लेती हैं और इन संकरी और गहरी नदियों से पानी घाटी में तेजी से आगे बढ़ता है. इससे बाढ़ की विनाशकारी क्षमता काफी बढ़ जाती है.नेपाल में इस समय भोटेकोशी नदी और त्रिशूली नदियां उफान पर हैं, जिससे गंभीर जलप्रलय और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है.