Friend Care policy
Friend Care policy
क्या रोजाना कुछ मिनट की फुर्सत आपके अकेलेपन को कम कर सकती है? स्वीडन की एक बड़ी फार्मेसी चेन ने इसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए अनोखा प्रयोग शुरू किया है. स्वीडन की फार्मेसी कंपनी Apotek Hjärtat ने अपने कर्मचारियों को दोस्तों से बातचीत के लिए छुट्टी देने का ऐलान किया है.
हाल ही में स्वीडन सरकार ने देश में अकेलेपन को लेकर एक सर्वे कराया. रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले रहे. इसके मुताबिक, देश के 8% वयस्क ऐसे हैं जिनका एक भी करीबी दोस्त नहीं है. इस रिपोर्ट के बाद अकेलेपन को एक गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में देखा जाने लगा.
स्वीडन में शुरू की गई फ्रेंड केयर पॉलिसी
Apotek Hjärtat ने अकेलेपन से निजात पाने के लिए Friend Care नाम की नई पॉलिसी शुरू की. इसके तहत कर्मचारियों को रोज 15 मिनट या महीने में 1 घंटे का समय दिया जाएगा. इस दौरान कर्मचारी अपने काम से ब्रेक लेकर फोन कॉल कर सकते हैं, किसी दोस्त से मिलने जा सकते हैं, कोई प्लान बना सकते हैं. कंपनी का साफ कहना है कि दोस्ती बढ़ाने वाली हर एक्टिविटी की इजाजत है. इसके अलावा कंपनी सालाना करीब 100 डॉलर तक की मदद भी देगी.
CEO को कहां से आया आइडिया
कंपनी की CEO मोनिका मैगनुसन ने BBC से कहा कि यह आइडिया एक पुराने प्रोग्राम से निकला. उस प्रोग्राम में फार्मासिस्टों को यह सिखाया गया था कि वे ग्राहकों, खासकर बुजुर्गों में अकेलेपन के संकेत कैसे पहचानें. फार्मासिस्टों को ऐसे सवाल पूछने के लिए ट्रेन किया गया, जिससे लोग खुलकर बात कर सकें. यहीं से मैगनुसन के मन में सवाल उठा जब हम ग्राहकों के अकेलेपन की परवाह कर रहे हैं, तो अपने कर्मचारियों के लिए क्या कर रहे हैं?
कर्मचारियों पर दिखा असर
BBC से बात करते हुए कर्मचारी यास्मिन लिंडबर्ग ने बताया कि चार साल पहले पार्टनर से अलग होने के बाद वह अक्सर खुद को अकेला महसूस करती थीं. काम से लौटने के बाद वह इतनी थक जाती थीं कि बाहर जाना या दोस्तों से मिलना मुश्किल लगता था. ये 15 मिनट उनके लिए बड़ा बदलाव लेकर आए. इससे उन्हें बाहर निकलने, प्लान बनाने और लोगों से मिलने की हिम्मत मिली.
स्वीडिश सोच भी है अकेलेपन की वजह
स्वीडन में अकेलेपन के पीछे देश की सोच भी एक कारण है. दरअसल स्वीडन में लोग दूसरों को परेशान न करने की सोच रखते हैं. हम निजी स्पेस को बहुत अहम मानते हैं और बातचीत की शुरुआत करना लोगों के लिए मुश्किल होता है.
कंपनी को उम्मीद है कि यह पहल न सिर्फ कर्मचारियों की जिंदगी बेहतर बनाएगी, बल्कि अकेलेपन जैसे गंभीर मुद्दे पर समाज में नई सोच भी पैदा करेगी.