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वेनेजुएला में दो बड़े भूकंप, कई इमारतों को नुकसान, हजारों मौतों की आशंका! 7.5 तीव्रता का झटका तबाही की वजह क्यों बनता है?

वेनेजुएला में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर दो बार धरती हिली. पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, वहीं दूसरा 7.5 तीव्रता का था. यह भूकंप मोंटाल्बान के उत्तर-पश्चिम में 28 किलोमीटर यानी करीब 17.3 मील दूर आया, जहां देश की कुछ सबसे बड़ी रिफाइनरियां स्थित हैं.

Venezuela quakes Venezuela quakes
हाइलाइट्स
  • 7.5 तीव्रता का भूकंप इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

  • फॉल्ट लाइन क्या होती है और इससे भूकंप कैसे आता है?

वेनेजुएला में बुधवार को कुछ ही सेकेंड के अंतराल पर आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी. राजधानी काराकस समेत कई इलाकों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है. पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि उसके करीब 40 सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और ज्यादा शक्तिशाली झटका आया. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने आशंका जताई है कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या हजारों से अधिक हो सकती है. देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और राहत-बचाव कार्य जारी हैं.

दो भूकंप, 40 सेकेंड का अंतर और बढ़ गई तबाही
विशेषज्ञों के अनुसार पहला भूकंप मुख्य झटके से पहले आने वाला फोरशॉक था. आमतौर पर ऐसे झटके बड़े भूकंप का संकेत हो सकते हैं. वेनेजुएला में भी यही हुआ. 7.2 तीव्रता के भूकंप के सिर्फ 40 सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया, जिसने नुकसान कई गुना बढ़ा दिया. जब एक बड़े भूकंप के तुरंत बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका आता है, तो पहले से कमजोर हो चुकी इमारतें और ढांचे ढहने लगते हैं. इसी कारण जान-माल का नुकसान भी बढ़ जाता है.

7.5 तीव्रता का भूकंप इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल या मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल पर मापी जाती है. इस स्केल पर हर एक अंक बढ़ने के साथ भूकंप की ताकत कई गुना बढ़ जाती है. इसे आसान उदाहरण से समझें. यदि एक व्यक्ति 10 किलो का हथौड़ा जमीन पर मारता है और दूसरा 300 किलो का, तो दोनों से कंपन होगा, लेकिन दूसरे का असर कहीं ज्यादा होगा. भूकंप में भी यही सिद्धांत लागू होता है.

7.5 तीव्रता का भूकंप 6.5 तीव्रता के भूकंप की तुलना में लगभग 32 गुना अधिक ऊर्जा छोड़ता है. इतनी ऊर्जा जमीन को जोरदार तरीके से हिलाती है, जिससे इमारतें, पुल, सड़कें और बिजली जैसी जरूरी संरचनाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं. इसी वजह से 7.0 से ऊपर की तीव्रता वाले भूकंपों को अत्यंत विनाशकारी श्रेणी में रखा जाता है.

बड़ी इमारतों को ज्यादा खतरा क्यों होता है?
भूकंप के दौरान जमीन के कंपन का असर ऊंची इमारतों पर ज्यादा पड़ता है. जितनी ऊंची इमारत होगी, उसके हिलने की संभावना उतनी अधिक होगी. यदि भवन Earthquake-resistant technology से नहीं बना है, तो उसके गिरने का खतरा बढ़ जाता है. काराकस जैसे घनी आबादी वाले शहरों में ऊंची इमारतों की संख्या अधिक है. ऐसे में तेज भूकंप आने पर नुकसान भी ज्यादा होता है. अस्पताल, स्कूल, पुल और संचार नेटवर्क भी प्रभावित हो सकते हैं.

भूकंप के बाद भी खतरा खत्म नहीं होता
भूकंप के बाद अक्सर छोटे-छोटे झटके आते रहते हैं, जिन्हें आफ्टरशॉक कहा जाता है. ये झटके कई दिनों या हफ्तों तक महसूस किए जा सकते हैं.

आफ्टरशॉक मुख्य भूकंप से कमजोर होते हैं, लेकिन पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों को गिराने के लिए काफी होते हैं. यही कारण है कि प्रशासन बड़े भूकंप के बाद लोगों को तुरंत घरों या दफ्तरों में लौटने की अनुमति नहीं देता.

वेनेजुएला में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
वेनेजुएला दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां भूकंप का खतरा अधिक रहता है. इसका कारण वहां मौजूद दो विशाल टेक्टोनिक प्लेटें हैं कैरिबियन प्लेट और साउथ अमेरिकन प्लेट. पृथ्वी की सतह कई बड़ी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं. जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के पास खिसकती हैं, तो उनके बीच तनाव पैदा होता है. यह तनाव जब अचानक टूटता है, तो भूकंप आता है.

फॉल्ट लाइन क्या होती है?
जहां दो प्लेटें मिलती हैं, वहां अक्सर दरारनुमा क्षेत्र बन जाते हैं, जिन्हें फॉल्ट लाइन कहा जाता है. वर्षों तक इन दरारों में ऊर्जा जमा होती रहती है. जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो धरती हिलने लगती है और भूकंप आता है.

दुनिया में कितनी बार आते हैं ऐसे भूकंप?
USGS के आंकड़ों के अनुसार 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप दुनिया में हर साल औसतन 10 से 20 बार आते हैं. हालांकि सभी भूकंप विनाशकारी नहीं होते. यदि उनका केंद्र समुद्र में या कम आबादी वाले क्षेत्रों में हो, तो नुकसान सीमित रहता है. लेकिन जब इतना शक्तिशाली भूकंप किसी बड़े शहर या औद्योगिक क्षेत्र के पास आता है, तो उसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.

भारत और अमेरिका ने जताई संवेदना
वेनेजुएला में आई इस आपदा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है. उन्होंने प्रभावित लोगों और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी राहत कार्यों के लिए सरकारी एजेंसियों को तैयार रहने का निर्देश दिया है.

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