PM Modi remembers Major Dalpat Singh
PM Modi remembers Major Dalpat Singh
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद नेसेट में अपने संबोधन में मेजर दलपत सिंह शेखावत का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीयों ने इस इलाके में अपनी जान कुर्बान की थी. इनमें हमारे मेजर ठाकुर दलपत सिंह हाइफा के हीरो थे. मेजर दलपत सिंह को हाइफा का नायक माना जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि वीर दलपत सिंह शेखावत कौन थे? इजरायल में वीर योद्धा की क्या कहानी है?
कौन थे मेजर दलपत सिंह शेखावत?
मेजर दलपत सिंह शेखावत राजस्थान के पाली जिले के एक गांव के रहने वाले थे. उनके गांव का नाम देवली था. उनका जन्म 26 जनवरी 1892 को हुआ था. दलपत सिंह रावणा शेखावत थे.
दलपत सिंह जोधपुर के महाराजा की सेना में मेजर थे. उस समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था. साल 1910 में ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल हो गए. इस दौरान वो मेजर के पद पर रहे. दलपत सिंह ने जोधपुरु लांसर्स को कमांड किया था.
क्या है हाइफा की लड़ाई की कहानी?
पहले विश्व युद्ध के दौरान हाइफा में मेजर दलपत सिंह ब्रिटिश सेना की तरफ से एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे. सितंबर 1918 को मेजर की टुकड़ी की हाइफा में तुर्की और जर्मन सेनाओं से जोरदार लड़ाई हुई थी. दलपत सिंह ने घुड़सवारों की टुकड़ी की अगुवाई की थी. इसमें जोधपुर की सेना के सैनिक थे.
इस टुकड़ी ने हाइफा पर हमला किया था. उस समय हाइफा ओटोमन का कब्जा था. जवानों ने तोपों और मशीनगनों के सामने तलवारों और भालों से लड़ाई लड़ी थी. मेजर दलपत सिंह हाइफा युद्ध के हीरो थे.
शहीद हुए थे वीर मेजर दलपत सिंह-
इस युद्ध में 8 सैनिक शहीद हुए थे. जबकि 34 सैनिक जख्मी हुए थे. इसके बावजूद जोधपुर लांसर्स ने दुश्मन के 700 सैनिकों को पकड़ा था. इसके साथ ही 17 फील्ड गन और 11 मशीन गन जब्त किए थे. इस लड़ाई में वीर मेजर दलपत सिंह शेखावत शहीद हुए थे. उस समय दलपत सिंह सिर्फ 26 साल के थे. बाद में उनको मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया था. भारतीय सेना हर साल 23 सितंबर को हाइफा दिवस मनाती है.
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