ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सुख, ज्ञान, विवाह और सौभाग्य का कारक माना गया है. शैलेंद्र पांडे ने बताया कि ज्योतिष का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह बृहस्पति को माना जाता है. कुंडली में बृहस्पति के अशुभ होने पर जीवन में समस्याएं आ सकती हैं. यदि बृहस्पति के कारण आपकी शादी नहीं हो पा रही है. दांपत्य जीवन में बाधा भी आ रही है तो आप परेशान न हों. यहां आप जान सकते हैं बृहस्पति देव की कृपा पाने के लिए कौन से उपाय करने चाहिए?
क्या बृहस्पति भी विवाह में देता है समस्या
बृहस्पति किसी महिला के विवाह का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है. बिना बृहस्पति के किसी महिला का विवाह हो ही नहीं सकता. बृहस्पति किसी पुरुष के जीवन में उसके जीवनसाथी के बारे में बताता है. बृहस्पति ही पुरुष के वैवाहिक जीवन को संतुलित करता है. यदि बृहस्पति विवाह में बाधा दे तो विवाह का होना और निभना दोनों चुनौती हो जाता है. बृहस्पति की कुछ स्थितियां व्यक्ति के विवाह के लिए काफी समस्याएं पैदा करती हैं. खराब होने पर बृहस्पति अलग तरह की समस्याएं देता है और कमजोर होने पर अलग तरह की.
गुरु कमजोर हो तो विवाह कैसे होता है प्रभावित
बृहस्पति अगर नीच राशि का हो, अस्त हो या सही स्थान पर न हो तो यह कमजोर होता है. कमजोर होने पर यह विवाह में विलम्ब करवा देता है. विवाह हो जाने के बाद यह वैवाहिक सुख नहीं लेने देता. इसके कारण विवाह के बाद संतान होने में भी विलम्ब होता है.
उपाय: ज्यादा से ज्यादा सात्विक रहें. दोनों वेला पूजा उपासना जरूर करें. सलाह लेकर एक पीला पुखराज धारण करें. नियमित रूप से गुरु मंत्र का जप करें.
खराब बृहस्पति का विवाह पर क्या पड़ता है प्रभाव
बृहस्पति अगर राहु शनि या केतु के प्रभाव में हो तो खराब हो जाता है. बृहस्पति खराब हो तो महिलाओं का विवाह नहीं हो पाता. अगर हो भी गया तो विवाह चल नहीं पाता. खराब बृहस्पति पुरुष को खराब व्यवहार और दुष्ट पत्नी देता है. ऐसे पुरुष अपनी पत्नी के कारण काफी कष्ट भोगते हैं.
उपाय: नित्य प्रातः सूर्य को हल्दी मिलाकर जल अर्पित करें. गायत्री मंत्र का जप अवश्य करें. मांस-मदिरा आदि का सेवन न करें . सलाह लेकर एक पन्ना धारण करें. दाढ़ी और बाल बड़े न रखें.
यदि बृहस्पति कुंडली में उत्तम हो तो विवाह पर क्या पड़ता है असर
बृहस्पति अगर उच्च, स्वगृही या मूल त्रिकोण में हो तो उत्तम होता है. सामान्यतः अपने मित्र के घर में बृहस्पति उत्तम रहता है. ऐसी दशा में महिला सम्पूर्ण रूप से अच्छी हो जाती है. उसका विवाह, वैवाहिक जीवन और संतान पक्ष उत्तम बना रहता है. पुरुष को अच्छी और सुगढ़ पत्नी मिलती है. ऐसी पत्नी के आने से उसके जीवन में उन्नति होती जाती है. यदि गुरु अच्छा हो तो उसकी शुभता बढ़ाने के लिए ईश्वर की शरण में रहें. ध्यान, मंत्र, जप और दान करते रहें.