मंत्र क्या होते हैं और उनका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? शैलेंद्र पांडे ने बताया कि मंत्र विशेष अक्षरों की संरचना होते हैं, जिनका विधि पूर्वक जप करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. उन्होंने कहा, मन्नात तारिएती यस्तु सह मंत्रह यानी जो मन का तारण कर दे, वह मंत्र है. मंत्रों का सही जप व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा पर गहरा प्रभाव डालता है. मंत्र जाप करने से व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है.
मंत्रों के प्रकार और जप के नियम
मंत्र वास्तव में दो शब्दों के ही होते हैं जिनका श्वास-प्रश्वास पर जाप किया जा सके. बाकी जिनको हम मंत्र समझते हैं, वो या तो ऋचाएं हैं या श्लोक. बीज मंत्र के साथ प्रयोग करने पर ऋचाएं और श्लोक भी पर्याप्त लाभकारी होते हैं. मंत्र दो प्रकार के होते हैं. पहला सामान्य मंत्र, जिन्हें कोई भी जप सकता है. दूसरा व्यक्तिगत मंत्र, जो गुरु द्वारा दिए जाते हैं. मंत्र जाप के लिए स्थान, समय और आसन एक ही होना चाहिए. इसकी शुरुआत किसी भी पूर्णिमा या अमावस्या से करनी चाहिए. आसन सफेद या काले रंग का होना उत्तम होता है. वैसे विशेष उद्देश्य के लिए विशेष आसन का प्रयोग कर सकते हैं. आसन जमीन से थोड़ा ऊंचा हो तो बहुत उत्तम होगा. रुद्राक्ष या चंदन की माला से जप करना लाभकारी होता है. अंगुलियों से भी मंत्र जाप कर सकते हैं. मंत्र जाप किसी भी अवस्था में किया जा सकता है, केवल शरीर का स्वच्छ रहना जरूरी है. शैलेंद्र पांडे ने कहा कि मंत्र जप करते समय रीड की हड्डी सीधी रखें और जल का स्पर्श 10 मिनट तक न करें.
मंत्रों के जप की सावधानियां
शैलेंद्र पांडे ने बताया कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध त्रुटिपूर्ण मंत्रों का जप न करें. उन्होंने कहा कि किसी आचार्य या प्रामाणिक पुस्तक से मंत्रों को समझकर ही उनका जप करें. गलत मंत्रों से नुकसान हो सकता है. मंत्रों का असर शरीर के चक्रों, मन और आत्मा पर पड़ता है, इसलिए इनका उच्चारण सही विधि और शुद्ध भावना से करना चाहिए. मंत्रों का विधि पूर्वक जाप करने से सृष्टी की समस्त उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं. यहां तक कि सिद्ध मंत्रों के जाप से मुक्ति और मोक्ष तक प्राप्त किया जा सकता है.
मंत्र कैसे करते हैं काम
हर शब्द के अंदर एक रंग और विशेष तरंग होती है. इसी प्रकार से हर व्यक्ति की भी रंग और तरंग होती है. जब ये शब्द सही तरीके से व्यक्ति के रंग और तरंग से मेल खा जाते हैं तो काम करना शुरू कर देते हैं. सबसे पहले मंत्र शरीर पर, फिर मन पर और तब आत्मा पर असर डालते हैं. इनका असर शरीर में स्थित चक्रों के माध्यम से होता है. हमेशा अपने मनोदशा और तत्वों को देखकर ही मंत्रों का चुनाव किया जाना चाहिए. कभी भी किसी मंत्र का प्रयोग किसी बुरे भावना से नहीं करना चाहिए अन्यथा क्रिया प्रतिक्रिया का नियम स्वयं को ही बुरी तरह से नुकसान करेगा.