जीवन में वहम और डर दोनों का गहरा प्रभाव होता है, लेकिन इनकी भूमिका समझना जरूरी है ताकि हम इनके ज्यादा शिकार ना बनें, बल्कि इन्हें सही दिशा में इस्तेमाल कर सकें. यह दोनों चीज़ हर शख्स के जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर उसके सामने जरूर आती हैं. ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम इनको समझें और इनके उपाय के बारे में जानें.
वहम अक्सर हमारी कल्पनाओं या अधूरी जानकारी से पैदा होता है. जब हम बिना ठोस कारण के नकारात्मक सोच बना लेते हैं, जैसे 'लोग मेरे बारे में गलत सोच रहे हैं' या 'मैं असफल हो जाऊंगा' तो यह वहम हमें तनाव और चिंता में डाल देता है. वहम हमें वास्तविकता से दूर ले जाकर हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है और सही निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है.
तो वहीं, डर का एक सकारात्मक और एक नकारात्मक पक्ष होता है. सकारात्मक रूप में डर हमें सावधान रखता है, जैसे खतरे से बचने में मदद करना. लेकिन जब डर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह हमें आगे बढ़ने से रोकता है, नए अवसर लेने से डराता है और हमें सीमित कर देता है. लेकिन सोच से अलग इन दोनों का संबंध ग्रहों के साथ भी होता है. वहम और डर के पीछे कौनसे ग्रह होते है और उपाय क्या है, वो आपको बताते हैं.
वहम और डर के पीछे कौन से ग्रह होते हैं?
वहम और डर दोनों ही मन से जुड़ी हुई समस्या होते हैं. ऐसे में हमारे मन का मजबूत होना जरूरी है. बात अगर ग्रह कनेक्शन की करें तो इसमें सबसे बड़ी भूमिका चन्द्रमा की होती है. दरअसल चन्द्रमा वह ग्रह है जो ज्यादातर मन में डर पैदा करता है. साथ ही दूसरी भूमिका निभाने का काम राहु करता है. राहु हमारे मन में ज्यादातर वहम पैदा करता है. राहु और चन्द्रमा की स्थिति मन में विचित्र समस्याएं पैदा करती है. जिससे हमारा जीवन काफी प्रभावित होता है.
कब जीवन में बढ़ती है डर की भूमिका?
जब भी किसी के जीवन में चन्द्रमा बहुत ज्यादा कमजोर हो जाता है, तो वह शख्स डर का शिकार होने लगता है. अब सवाल उठता है कि चंद्रमा कमजोर कब और क्यों होता है. चंद्रमा के कमजोर होने के पीछे कई कारण होते है. जैसे चंद्रमा पर जब शनि का काफी ज्यादा प्रभाव पड़ने लगे, या फिर चंद्रमा की दशा खराब चल रही हो. इसके अलावा चंद्रमा का जब केतु के साथ संबंध बनता है तब भी चंद्रमा की स्थिति कमजोर हो जाती है. ऐसे में शख्स डर का ज्यादा शिकार होता है.
कब वहम की समस्या ज्यादा होती है?
जिस प्रकार किसी के भी जीवन में डर का शिकार होने के पीछे चंद्रमा ग्रह भूमिका निभाता है. उसी प्रकार जब कोई शख्स वहम का शिकार ज्यादा होने लगता है, तो इसका मतलब होता है कि उसकी कुंडली में राहु का प्रभाव ज्यादा होने लगा है. वहम के पीछे राहु ग्रह काफी हद तक जिम्मेदार होता है. जब राहु की दशा खराब होती है, या उसका चंद्रमा के साथ संबंध होने लगता है या फिर जब किसी का शुक्र ग्रह खराब हो, तब भी वह वहम का ज्यादा शिकार होता है. खास तौर पर अगर जन्म की बात करें तो जिनका जन्म संध्याकाल में होता है तो वह वहम का ज्यादा शिकार होता है.
किस तरह दूर करें वहम और डर को?
वहम और डर को दूर करने के लिए रोज प्रात: सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए. साथ ही महीने की दोनों एकादशी का उपवास रखने से भी यह परेशानी दूर होती है. अगर ज्यादा तेल-मसालों वाला भोजन करते हैं, तो ऐसा करना रोक दें, आपकी परेशानी दूर हो सकती है. साथ ही मांसाहार भी बंद करने से फायदा मिल सकता है. अगर आप पन्ना या पुखराज धारण करते हैं, तो यह रत्न भी आपकी मदद कर सकते हैं.