अचानक आया अस्पताल का खर्च, नौकरी छूटना या घर में कोई बड़ी परेशानी... ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पैसों का इंतजाम कैसे किया जाए. कई लोग म्यूचुअल फंड की SIP बंद कर देते हैं या निवेश निकाल लेते हैं. वहीं कुछ लोग पर्सनल लोन ले लेते हैं. लेकिन हर सिचुएशन में एक ही तरीका ठीक नहीं होता. लोन लें या एसआईपी तोड़े जैसा फैसला लेने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना जरूरी है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर व्यक्ति के पास कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए. अगर ऐसा फंड पहले से बना है तो अचानक आने वाले खर्च के लिए SIP रोकने या तोड़ने या लोन लेने की नौबत नहीं आती. इसलिए इस फंड का होना काफी जरूरी होता है. इसी लिए इस फंड को तैयार करने को कहा जाता है.
अगर आप SIP बंद कर देते हैं या म्यूचुअल फंड से पैसा निकाल लेते हैं, तो आपका निवेश बीच में रुक जाता है. इससे लंबे समय में मिलने वाला कंपाउंडिंग का फायदा कम हो जाता है. इसके अलावा कुछ मामलों में टैक्स या एग्जिट चार्ज भी देना पड़ सकता है. अगर बाजार बाद में ऊपर चला जाए, तो उस बढ़त का फायदा भी आपको नहीं मिलेगा.
अगर आपको कम ब्याज पर लोन मिल रहा है और आप उसे कुछ महीनों में आसानी से चुका सकते हैं, तो SIP जारी रखना बेहतर हो सकता है. खासकर म्यूचुअल फंड के बदले मिलने वाला लोन कई बार अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इसमें आपका निवेश बना रहता है और जरूरत के समय पैसा भी मिल जाता है.
अगर आपको क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन जैसे महंगे लोन लेने पड़ रहे हैं, जिन पर बहुत ज्यादा ब्याज लगता है, तो केवल निवेश बचाने के लिए ऐसा करना सही नहीं माना जाता. ऐसे मामलों में कुछ समय के लिए SIP रोकना ज्यादा अच्छा फैसला हो सकता है. ज्यादा ब्याज देना आपकी जेब पर बड़ा बोझ डाल सकता है.
अगर आपके पास सस्ता लोन है और उसे चुकाने की पावर भी है, तो SIP जारी रखना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन अगर लोन महंगा है और उसकी किस्तें चुकाना मुश्किल है, तो कुछ समय के लिए SIP रोकना बेहतर रहेगा. सबसे अच्छी तैयारी यही है कि पहले से मजबूत इमरजेंसी फंड बनाएं. इससे मुश्किल समय में न निवेश टूटेगा और न ही महंगा कर्ज लेना पड़ेगा.