Old vs New Tax Regime: ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम... आखिर कौन बेहतर? गलती से भी कर दी ये मिस्टेक... तो देना पड़ेगा ज्यादा टैक्स 

ITR Filing 2026: टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करने के लिए ओल्‍ड टैक्‍स रिजीम और न्यू टैक्स रिजीम का दो विकल्प मिलता है. कई बार करदाता जानकारी नहीं होने और जल्दी के चक्कर में गलत टैक्स रिजीम का चुनाव कर लेते हैं. ऐसे में उन्हें ज्यादा टैक्स भरना पड़ता है. आज हम आपको बता रहे हैं कि आईटीआर दाखिल करते समय अक्सर लोग कौन सी गलतियां करते हैं और किसके लिए कौन सा टैक्स रिजीम बेहतर है?

Old Tax Regime vs New Tax Regime
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्‍स रिटर्न फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं. अब जल्द ही इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. ITR दाखिल करने के लिए ओल्‍ड टैक्‍स रिजीम (Old Tax Regime) और न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) का दो विकल्प मिलता है. कई बार करदाता जानकारी नहीं होने और जल्दी के चक्कर में गलत टैक्स रिजीम का चुनाव कर लेते हैं. ऐसे में उन्हें ज्यादा टैक्स भरना पड़ता है. आज हम आपको बता रहे हैं कि आईटीआर दाखिल करते समय अक्सर लोग कौन सी गलतियां करते हैं और किसके लिए कौन सा टैक्स रिजीम बेहतर है?

आपको मालूम हो कि ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपए तक की सालाना आय पर टैक्स नहीं लगता है. इसके साथ ही कई तरह की कटौतियां और छूट भी मिलती हैं. उधर, न्यू टैक्स रिजीम 12 लाख रुपए तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. न्यू टैक्स रिजीम में नौकरी करने वालों को 75000 रुपए की स्टेंर्डड डिडक्शन भी मिलता है.

सही टैक्स रिजीम चुनना जरूरी क्यों 
आपको मालूम हो कि टैक्स रिजीम ही यह तय करता है कि आपकी जेब में कितने रुपए बचेंगे. आपका एक गलत चुनाव पूरे साल की बचत को खत्म कर सकता है. आईटीआर भरते समय अक्सल लोग सबसे बड़ी गलती जो करते हैं, वह यह है कि वे बिना अपनी आय का कैलकुलेशन किए रिजीम चुन लेते हैं. कई लोग सिर्फ यह सुनकर रिजीम का चुनाव कर लेते हैं कि न्यू टैक्स रिजीम भरना ज्यादा आसान और इसमें टैक्स छूट भी ज्यादा है तो वहीं कई लोग ओल्ड टैक्स रिजीम ज्यादा फायदा सुनकर इसका चुनाव कर लेते हैं. आपको मालूम हो कि हर व्यक्ति की आय और Deductions अलग होती है. ऐसे में सिर्फ सुनकर टैक्स रिजीम का चुनाव नहीं करना चाहिए बल्कि सही तरीका यह है कि दोनों में टैक्स निकालकर तुलना करें और फिर अंतिम मुहर लगाएं.

Deductions यानी कटौती को नजरअंदाज कर देना 
कई लोग टैक्स रिजीम का चुनाव करते समय Deductions यानी कटौती को नजरअंदाज कर देते, जो उनकी दूसरी बड़ी गलती है. ओल्ड टैक्स रिजीम में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट दी जाती है. आपको 80C के तहत PPF व ELSS, 80D के तहत इंश्योरेंस, HRA पर टैक्स छूट मिलता है. यदि आप इन सभी चीजों को लाभ उठा रहे हैं तो आपके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम अधिक फायदेमंद हो सकता है. कई लोग इसे इग्नोर कर देते हैं. 

न्यू टैक्स रिजीम को हमेशा बेहतर मानना 
कई लोग न्यू टैक्स रिजीम को हमेशा बेहतर मानने की गलती कर बैठते हैं. वे सोचते हैं न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स छूट ज्यादा है और यह सिंपल भी है. आपको मालूम हो कि हर किसी के लिए न्यू टैक्स रिजीम बेहतर नहीं है. यदि आपकी कटौती ज्यादा है तो आपके लिए ओल्ड रिजमी ज्यादा टैक्स बचत देगा.

आपनी आय के हिसाब से निर्णय न लेना 
कई लोग अपनी आय के हिसाब से फैसला नहीं करते हैं, जो बड़ी गलती करते हैं. आपको मालूम हो कि 5 लाख रुपए बनाम 15 लाख रुपए इनकम दोनों के लिए सही जवाब अलग होगा. कम आय वालों के लिए न्यू रिजीम ठीक हो सकता है जबकि अधिक Deductions वालों के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम बेहतर है. आपको मालूम हो कि कोई भी एक ऑप्शन सबके लिए बेस्ट नहीं. आपको अपनी आय के हिसाब से चुनना होगा. यही सबसे बड़ा फायदा देगा

साल की शुरुआत में ही प्लानिंग न करना 
आपको मालूम हो टैक्स कटने से बचाने के लिए साल की शुरुआत में ही प्लानिंग कर लेनी चाहिए. ऐसा नहीं कर आप गलती करते हैं. कई लोग साल के आखिर में टैक्स बचाने के सोचते हैं, तब तक ऑप्शन लिमिटेड हो जाते हैं. सही तरीका यह है कि साल की शुरुआत में ओल्ड बनाम न्यू का बेसिक फर्क समझ लेना चाहिए. ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम में से सही विकल्प का चुनाव करने के लिए सबसे पहले अपनी टोटल इनकम निकालें. इसके बाद सभी Deductions को जोड़ें. ऐसा करने के बाद दोनों टैक्स रिजीम में टैक्स Calculate करें. अब जो कम टैक्स दे वही चुनें. आप इस बात को अच्छी तरह से समझ लें कि ओल्ड vs न्यू टैक्स रिजीम आपके लिए कोई कोई कंपटीशन नहीं है. दरअसल यह पर्सनल च्वाइस है तो सही फैसला वही है जो आपको ज्यादा बचत दे.

ओल्ड टैक्स रिजीम में क्या-क्या मिलते हैं फायदे
ओल्ड टैक्स रिजीम यानी पुरानी टैक्स रिजीम में चार टैक्स स्लैब हैं. पहला टैक्स स्लैब 2.5 लाख रुपए का है. इसमें 0 प्रतिशत टैक्स लगता है. 2.5 से 5 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स, 5 से 10 लाख रुपए की इनकम पर 20 प्रतिशत टैक्स, और 10 लाख से अधिक की इनकम पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है. ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है. हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत आपको 5 लाख तक की इनकम पर जीरो टैक्स देना होगा.

इसके अलावा ओल्ड टैक्स रिजीम में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट दी जाती है. इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि में कर्मचारी का योगदान, एक निश्चित सीमा तक यात्रा भत्ता पर छूट, किराए के अपार्टमेंट में रहने पर मकान किराया भत्ता पर छूट मिलता है. धारा 80CCD (2) के तहत राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में नियोक्ता का योगदान. धारा 80CCD (1b) के तहत NPS निवेश के लिए 50000 रुपए की कटौती. स्वयं, परिवार और माता-पिता के लिए भुगतान किए गए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए धारा 80D कटौती. बचत खाते से अर्जित ब्याज पर धारा 80TTA कटौती. दिव्यांग के मामले, छूट प्राप्त संस्थानों को दान आदि पर भी कटौती की अनुमति ओल्ड टैक्स रिजीम दी जा सकती है.

न्यू टैक्स रिजीम के फायदे
न्यू टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपए तक की इनकम यानी आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. इसमें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं. नई टैक्स रिजीम में सैलरिड पर्सन को 75000 रुपए की स्टेंर्डड डिडक्शन भी मिलता है. हालांकि न्यू टैक्स रिजीम में ओल्ड टैक्स रिजीम की तरह कोई और कटौतियों का लाभ नहीं मिलता है.

न्यू टैक्स रिजीम में कितनी इनकम पर कितना लगता है टैक्स
1.
4 लाख रुपए तक की इनकम पर 0 प्रतिशत टैक्स.
2. 4 से 8 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स.
3. 8 से 12 लाख रुपए तक की इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स.
4. 12 से 16 लाख रुपए तक की इनकम पर 15 प्रतिशत टैक्स.
5. 16 से 20 लाख रुपए तक की इनकम पर 20 प्रतिशत टैक्स.
6. 20 से 24 लाख रुपए तक की इनकम पर 25 प्रतिशत टैक्स.
7. 24 लाख रुपए से अधिक की इनकम पर 30 प्रतिशत टैक्स.

नोटः न्यू टैक्स रिजीम में 4 से 8 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स और 8 से 12 लाख रुपए तक की इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स सरकार सीधे माफ कर देती है.

कितना बनता है टैक्स
12 लाख रुपए की कमाई पर 60 रुपए टैक्स बनता है. न्यू टैक्स रिजीम में सरकार इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87ए के तहत 60 हजार रुपए माफ कर देती है. सैलरीड पर्सन को 75 हजार रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलता है. इस तरह से इनकी 12.75 लाख रुपए तक की आय टैक्स फ्री हो जाती है. यदि आप सैलरीड पर्सन नहीं हैं तो आपकी आय 12 लाख रुपए से 1 रुपए भी ज्यादा होती है तो आपको 87ए का फायदा नहीं मिलेगा. आपको 4 लाख से अधिक की आय पर टैक्स चुकाना होगा.

ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में से कौन बेहतर
ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत टैक्सपेयर्स को सेक्शन 80सी, लीव ट्रेवल अलाउंस और रेंट अलाउंस का फायदा मिलता है. सेक्शन 80 सी का फायदा आप अलग-अलग टैक्स सेविंग में निवेश कर उठा सकते हैं. सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए का टैक्स माफ हो जाता है. यदि आपने ऐसी किसी स्कीम में अप्लाई किया है, जिसमें सेक्शन 80सी लाभ मिले या कोई अलाउंस से आप टैक्स कम कर पा रहे हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम ही बेहतर विकल्प रहेगा. 

उधर, नई टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को 12 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है. यदि आपको सेक्शन 80 सी का फायदा नहीं मिल रहा है या किसी भी टैक्स सेविंग में अप्लाई नहीं किया है, तो नई टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. करदाता ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम में से किसे चुनें. यह फैसला उनकी आय, खर्चों और टैक्स बचाने की योजनाओं पर निर्भर करता है. ऐसे मामलों में जहां करदाताओं के पास कटौती या छूट का दावा करने के सीमित साधन हैं, उनके लिए नई कर व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अधिक कर बचत प्रदान करेगी. वैसे लोग जो टैक्स का भुगतान सरल तरीके से करना चाहते हैं, उन्हें न्यू टैक्स रिजीम ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.


 

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