हर महीने सैलरी आते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक ही चिंता रहती है कि पैसा पूरे महीने कैसे चलेगा और बचत कैसे होगी. जब मासिक आय करीब 30 हजार रुपए हो, तो खर्च और सेविंग के बीच संतुलन बनाना और भी जरूरी हो जाता है. अच्छी बात यह है कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग और कुछ आसान नियम अपनाकर कम सैलरी में भी आराम से घर चलाया जा सकता है और भविष्य के लिए मजबूत बचत तैयार की जा सकती है. आइए समझते हैं कि 30 हजार रुपये की सैलरी को समझदारी से कैसे मैनेज किया जाए.
सलाहकारों का मानना है कि आपकी आमदनी के हिसाब से खर्च तय होना चाहिए. अगर आपकी सैलरी 30 हजार रुपए महीना है, तो कोशिश करें कि आपका सालाना किराया दो महीने की सैलरी से ज्यादा न हो. यानी महीने का किराया लगभग 5 हजार रुपए के आसपास रखना बेहतर है. इसी तरह आपकी कुल ईएमआई आपकी मासिक आय के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. हर महीने 9 हजार रुपए से ज्यादा लोन या ईएमआई पर खर्च करना आपकी वित्तीय सेहत पर दबाव डाल सकता है.
सेविंग की आदत ही बनाएगी मजबूत भविष्य
कम कमाई होने पर भी बचत को टालना सही नहीं है. एक अच्छा नियम है कि हर महीने कम से कम 20 प्रतिशत आय बचत में डालें. 30 हजार रुपए की सैलरी पर यह राशि लगभग 6 हजार रुपए होती है. इसके साथ ही इमरजेंसी फंड बनाना बेहद जरूरी है. जीवन में अचानक आने वाली मेडिकल या नौकरी से जुड़ी परेशानियों के लिए कम से कम 6 महीने के खर्च जितनी रकम अलग रखनी चाहिए. यह फंड आपको मुश्किल समय में कर्ज लेने से बचाता है.
बीमा और रिटायरमेंट प्लानिंग
फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए लाइफ इंश्योरेंस अहम भूमिका निभाता है. आम तौर पर सलाह दी जाती है कि आपकी लाइफ कवर आपकी सालाना आय का कम से कम 15 गुना होना चाहिए. इससे परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलती है. वहीं रिटायरमेंट प्लानिंग को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर समय रहते निवेश शुरू किया जाए, तो छोटी रकम से भी बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है.
बजट ही है असली गेम चेंजर
पैसों को सही दिशा देने का सबसे आसान तरीका है बजट बनाना. जब आप अपनी आय को खर्च, बचत, ईएमआई और जरूरी जरूरतों में बांटते हैं, तो यह साफ दिखता है कि पैसा कहां खर्च हो रहा है. हर महीने खर्चों की सूची बनाना, खरीदारी से पहले जरूरतें लिखना और फिजूल खर्च से बचना आपकी सेविंग को तेजी से बढ़ा सकता है. छोटी-छोटी फाइनेंशियल डिसिप्लिन ही लंबे समय में बड़ी संपत्ति बनाती है.