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UK–US में 'जॉब हगिंग' का ट्रेंड, नौकरी छोड़ने से डर रहे कर्मचारी, ग्रोथ से ज्यादा सिक्योरिटी को दे रहे अहमियत

जॉब हगिंग का मतलब है नौकरी छोड़कर नए मौके तलाशने के बजाय मौजूदा नौकरी से चिपके रहना. हालात ऐसे हैं कि कर्मचारी जोखिम लेने की बजाय उसी नौकरी में टिके रहना चाहते हैं, भले ही उन्हें ज्यादा ग्रोथ या बेहतर अवसर न मिले.

job hugging
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 15 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST
  • कर्मचारी बदलने से बच रहे नौकरी
  • कर्मचारी छोड़ने की बजाय थामे हुए मौजूदा जॉब

ब्रिटेन और अमेरिका के कर्मचारियों में इन दिनों जॉब हगिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है. नए अवसरों की कमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण लोग नौकरी बदलने से बच रहे हैं. ज्यादातर कर्मचारी अब महत्वाकांक्षा से ज्यादा स्थिरता को अहम मानते हुए अपनी मौजूदा नौकरी से चिपके हुए हैं.

HR प्लेटफॉर्म एम्प्लॉयमेंट हीरो की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 में बजट पेश होने के बाद से जॉब मार्केट में सुस्ती देखी गई है. दिसंबर 2024 में रोजगार स्तर 0.9% गिर गया, जबकि आमतौर पर इस समय पर रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर ज्यादा लोगों को हायर करते हैं क्योंकि क्रिसमस सीजन में डिमांड बढ़ती है.

हालांकि फरवरी 2025 से मार्केट में सुधार दिखने लगा और जुलाई तक रोजगार में महीने-दर-महीने 1.7% की बढ़त दर्ज हुई. इसके बावजूद, पिछले साल जुलाई की तुलना में इस बार रोजगार वृद्धि आधी ही रही. यह संकेत है कि पिछले एक साल में मार्केट की रफ्तार धीमी हो गई है.

जॉब हगिंग क्या है?
जॉब हगिंग का मतलब है नौकरी छोड़कर नए मौके तलाशने के बजाय मौजूदा नौकरी से चिपके रहना. हालात ऐसे हैं कि कर्मचारी जोखिम लेने की बजाय उसी नौकरी में टिके रहना चाहते हैं, भले ही उन्हें ज्यादा ग्रोथ या बेहतर अवसर न मिले. इसे जॉब सेफ्टी को महत्व देने की नई प्रवृत्ति भी कहा जा सकता है.

क्यों बढ़ी जॉब हगिंग?
चांसलर रैचेल रीव्स ने अक्टूबर बजट में बिजनेस टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया था. खासतौर पर नेशनल इंश्योरेंस की दर बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ गई. यह बदलाव अप्रैल से लागू हुआ और इसी के बाद से जॉब मार्केट पर असर साफ दिखने लगा.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह टैक्स बढ़ोतरी कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों का भरोसा हिला चुकी है.

कर्मचारी क्यों कर रहे हैं “जॉब हगिंग”?
रिपोर्ट में सामने आया कि 55% कर्मचारी महत्वाकांक्षा से ज्यादा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं. मतलब यह कि वे नई नौकरी तलाशने से ज्यादा, अपनी मौजूदा नौकरी बचाए रखने में विश्वास कर रहे हैं.

खासकर युवा पीढ़ी इस सोच से ज्यादा प्रभावित है. 18 से 34 साल के 65% युवाओं ने कहा कि वे मौजूदा नौकरी की सुरक्षा चाहते हैं. वहीं, इसी आयु वर्ग के 53% युवाओं का मानना है कि आज की तारीख में नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है. लोग मौजूदा हालात में स्थिर रहना चाहते हैं क्योंकि नई नौकरियों के अवसर कम होते जा रहे हैं. नौकरी बदलने की कम इच्छा का असर कंपनियों पर भी दिख रहा है.

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