अगर आपके बैंक खाते में पैसे जमा हैं और आप उन पर ज्यादा ब्याज कमाना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक अच्छा विकल्प हो सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेगुलर FD के अलावा स्वीप-इन FD की सुविधा भी मिलती है? दोनों में पैसा जमा करने और जरूरत पड़ने पर निकालने का तरीका अलग होता है. ऐसे में सही विकल्प चुनने से आपको अपनी बचत का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है. आइए जानते हैं स्वीप-इन FD और रेगुलर FD में क्या अंतर है.
क्या होती है स्वीप-इन FD?
स्वीप-इन FD एक ऐसी सुविधा है, जिसमें आपका सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट आपस में जुड़े होते हैं. जब आपके बैंक खाते में तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा हो जाता है, तो अतिरिक्त रकम अपने आप FD में चली जाती है. इससे आपको बचत खाते के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिल सकता है.
इसकी खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर बैंक FD से जरूरी रकम वापस आपके बचत खाते में ला सकता है. इससे आपको पूरी FD बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, यह सुविधा बैंक के नियमों पर निर्भर करती है.
क्या होती है रेगुलर FD?
रेगुलर FD में आप एक तय रकम को निश्चित समय के लिए बैंक में जमा करते हैं. यह अवधि कुछ महीनों से लेकर कई साल तक हो सकती है. बैंक जमा रकम और चुनी गई अवधि के आधार पर ब्याज देता है.
अगर आप तय समय से पहले पैसा निकालना चाहते हैं, तो FD को समय से पहले बंद करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में बैंक के नियमों के अनुसार ब्याज कम मिल सकता है या जुर्माना लग सकता है.
स्वीप-इन FD और रेगुलर FD में अंतर
स्वीप-इन FD में तय सीमा से ज्यादा रकम अपने आप जमा होती है, जबकि रेगुलर FD में आपको खुद रकम जमा करनी होती है. स्वीप-इन FD से जरूरत के अनुसार रकम वापस खाते में आ सकती है. रेगुलर FD में समय से पहले पैसे निकालने के लिए अलग प्रक्रिया हो सकती है.
दोनों में FD की लागू ब्याज दर मिल सकती है. हालांकि, समय से पहले निकासी से मिलने वाले ब्याज पर असर पड़ सकता है. दोनों की शर्तें अलग हो सकती हैं. स्वीप-इन FD में न्यूनतम बैलेंस और निकासी के नियम लागू हो सकते हैं.
आपके लिए कौन सी FD सही है?
अगर आपके सेविंग्स अकाउंट में अक्सर अतिरिक्त पैसा रहता है और आपको जरूरत पड़ने पर उसे निकालना भी होता है, तो स्वीप-इन FD पर विचार कर सकते हैं. वहीं, अगर आपके पास ऐसी रकम है जिसकी जरूरत लंबे समय तक नहीं पड़ेगी, तो रेगुलर FD एक विकल्प हो सकती है.