आज EMI पर सामान खरीदना बहुत आसान हो गया है. मोबाइल, फर्नीचर, टीवी से लेकर वेकेशन प्लान तक के लिए किस्त की सुविधा मिल जाती है. 'Buy Now, Pay Later' जैसी सुविधा ने खरीदारी को और आसान बना दिया है. लेकिन छोटी-छोटी EMI मिलकर आपकी सैलरी का बड़ा हिस्सा हर महीने ले सकती हैं.
मान लीजिए फोन की EMI 3000 रुपए है. सोफा लेने पर 2000 रुपए की दूसरी EMI शुरू हो गई. फिटनेस डिवाइस की 1500 रुपए और छुट्टी की 5000 रुपए की किस्त भी चल रही है. अलग-अलग देखें तो सभी रकम छोटी लगती हैं. लेकिन इन्हें जोड़ने पर हर महीने 11,500 रुपए का बोझ बन जाता है. यही EMI ट्रैप की शुरुआत हो सकती है.
पहले लोग बड़ी चीज खरीदने से पहले पैसे बचाते थे. अब कई लोग सामान की पूरी कीमत के बारे में सोचने के बजाय हर महीने कितनी EMI देनी होगी के बारे में सोचते हैं. इससे महंगी चीज भी आसानी से खरीदने लायक लगती है. धीरे-धीरे EMI लेना रोज की खरीदारी का हिस्सा बन सकता है. इससे बचत और निवेश के लिए पैसा कम बचता है.
हर EMI आपकी आने वाली कमाई पर पहले से लगा हुआ खर्च है. अगर सैलरी का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाए, तो अचानक आने वाले खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है. अगर टेक होम सैलरी का 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा होम लोन के अलावा किसी और कर्ज को चुकाने में जा रहा है, तो फाइनेंशियल स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है.
किसी चीज को EMI पर लेने से पहले सोचें कि वह चीज़ सच में जरूरी है या सिर्फ मन की इच्छा. अगर सामान जरूरी नहीं है, तो कुछ महीने पैसे बचाकर खरीदना बेहतर हो सकता है.