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बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत घटाया गया एजुकेशन लोन? सरकार ने एक-एक चीज बताया

बिहार सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर साफ कर दिया है कि शिक्षा ऋण की कुल उपलब्धता को 2 लाख रुपये तक सीमित नहीं किया गया है. सरकार के मुताबिक, 2 लाख रुपये तक की राशि बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन, 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की राशि निर्धारित बैंकों और अधिक राशि के लिए पात्र छात्रों को PM-Vidyalaxmi के माध्यम से शिक्षा ऋण का विकल्प उपलब्ध है.

Samrat Choudhary (Photo/PTI)
रोहित कुमार सिंह
  • पटना,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST

बिहार सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शिक्षा ऋण देने की व्यवस्था में बदलाव किया है. नई व्यवस्था के तहत बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन के माध्यम से छात्रों को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिलेगा. वहीं, 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता निर्धारित बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी.

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बदलाव-
पहले बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन के माध्यम से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता था. नई व्यवस्था में 2 लाख रुपये तक की राशि राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से और 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की राशि बैंकों के माध्यम से उपलब्ध होगी.

नहीं घटाया गया शिक्षा लोन-
बिहार के उच्च शिक्षा विभाग ने इस बदलाव को लेकर स्पष्ट किया है कि छात्रों के लिए कुल शिक्षा ऋण की सीमा को घटाकर 2 लाख रुपये नहीं किया गया है. विभाग के अनुसार, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 4 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता अब अलग-अलग माध्यमों से उपलब्ध होगी. इसके अलावा, अधिक राशि की जरूरत वाले छात्रों के लिए केंद्र सरकार की PM-Vidyalaxmi योजना के तहत शिक्षा ऋण का विकल्प भी उपलब्ध है.

पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल से 10 लाख तक का लोन-
PM-Vidyalaxmi Portal के माध्यम से पात्र छात्र निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों के आधार पर 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं. लोन की मंजूरी छात्र, पाठ्यक्रम, शिक्षण संस्थान, बैंक और योजना की पात्रता शर्तों पर निर्भर करेगी.

छात्रों की सुविधा के लिए जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र यानी DRCC के माध्यम से PM-Vidyalaxmi Portal पर आवेदन करने में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को 5 साल के लिए बढ़ाया गया-
सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को अगले पांच वर्षों के लिए भी बढ़ा दिया है. अब यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी.

योजना के लिए मंजूर राशि में भी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी हुई है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 886 करोड़ रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई थी. वहीं, 2026-27 में 950 करोड़ रुपये के व्यय की मंजूरी दी गई है. यानी एक साल में योजना के लिए स्वीकृत व्यय में 64 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है.

सरकार के अनुसार, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को बैंकों और PM-Vidyalaxmi Portal से जोड़ने का उद्देश्य उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को संस्थागत वित्तीय सहायता के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों के आवेदन पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं, वे नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे.

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की कब हुई थी शुरुआत?
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2016 को ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत की गई थी. योजना का उद्देश्य 12वीं कक्षा पास करने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है.

तेजस्वी यादव ने उठाए थे सवाल-
इस मुद्दे पर RJD नेता तेजस्वी यादव ने बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. यादव ने दावा किया कि बिहार गंभीर आर्थिक और वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. उन्होंने राज्य के कर्ज, राजकोषीय घाटे और सरकारी खर्च को लेकर सरकार से सवाल किए.

तेजस्वी यादव ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का जिक्र करते हुए दावा किया कि छात्रों को मिलने वाली राशि कम की गई है. उन्होंने छात्रवृत्ति को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए हैं.

यादव ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा GSDP का 5.8 प्रतिशत रहा. उन्होंने राज्य के कर्ज और राजस्व की स्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि पिछले दो वर्षों में बड़ी मात्रा में कर्ज लिया गया है.

तेजस्वी यादव ने कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और ठेकेदारों के भुगतान सहित विकास कार्यों के लिए सरकार के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.

हालांकि, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर बिहार सरकार का कहना है कि शिक्षा ऋण की कुल उपलब्धता को 2 लाख रुपये तक सीमित नहीं किया गया है. सरकार के मुताबिक, 2 लाख रुपये तक की राशि बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन, 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की राशि निर्धारित बैंकों और अधिक राशि के लिए पात्र छात्रों को PM-Vidyalaxmi के माध्यम से शिक्षा ऋण का विकल्प उपलब्ध है.

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