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हौसले की उड़ान! हाथों नहीं, पैरों से करती हैं काम, 13 साल की मानसी की कहानी

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के इंदिरापुरम की रहने वाली 13 साल की मानसी दिव्यांग हैं. वो पैरों से काम करती है. वो पढ़ाई में भी अच्छी है. इसके साथ ही वो पैरों से घर के कामों में हाथ बंटाती हैं. वो पढ़ाई में भी अच्छी हैं.

Disabled Mansi
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:13 PM IST

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हाथ साथ न दें, तो जिंदगी कैसे आगे बढ़े? लेकिन दिल्ली से सटे गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एक 13 साल की बच्ची ने ये साबित कर दिया है कि हौसले के आगे हर कमी छोटी पड़ जाती है. दोनों हाथों से दिव्यांग मानसी अपने पैरों से वो हर काम करती है, जो आम लोग हाथों से करते हैं.

पैरों से काम करती है दिव्यांग मानसी-
13 साल की मानसी गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एक सरकारी स्कूल में 5वीं क्लास में पढ़ती हैं. मानसी जन्म से सामान्य थीं, लेकिन बचपन में ही उनके दोनों हाथों का विकास रुक गया. हालांकि शारीरिक चुनौती ने मानसी के हौसलों को कभी नहीं रोका. वह पैरों से लिखती हैं, पढ़ाई करती हैं, अपना बैग उठाती हैं, खाना खाती हैं और रोजमर्रा के सभी काम खुद करती हैं. लेकिन ड्राइंग करना मानसी का सबसे पसंदीदा काम है.

बेटी की शिक्षा ही सबसे बड़ी ताकत- मां
मानसी की मां मंजू घरों में काम करती हैं. आर्थिक तंगी और जिंदगी की तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी को कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया. मंजू बताती हैं कि उन्होंने एम्स जैसे बड़े अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि हाथ ठीक नहीं हो पाएंगे. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि बेटी को शिक्षा ही सबसे बड़ी ताकत देगी. मां ने कहा कि अगर मेरी बेटी पढ़-लिख जाएगी तो अपनी जिंदगी खुद संभाल लेगी. जब तक मैं जिंदा हूं, उसे काबिल बनाने की पूरी कोशिश करूंगी.

ट्रेन हादसे में हुई थी पिता की मौत-
मानसी के पिता की 2021 में ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई थी. मानसी की लगन देखकर शिक्षक भी हैरान हैं. इंदिरापुरम स्थित कंपोजिट स्कूल की प्रिंसिपल भारती रावत कहती हैं कि मानसी पैरों से इतनी सुंदर लिखती हैं, जितना कई बच्चे हाथों से भी नहीं लिख पाते. पढ़ाई में भी वह किसी से पीछे नहीं हैं.

स्कूल की प्रिंसिपल भारती रावत का कहना है कि मुझे उसकी पेंटिंग देखकर यकीन ही नहीं होता था कि ये उसने पैरों से बनाई है. हम मानसी की हर संभव मदद करते हैं. हमें विश्वास है कि वह एक दिन बहुत आगे जाएगी.

घर में भी काम करती है मानसी-
स्कूल से लौटकर मानसी घर के कामों में भी हाथ नहीं, बल्कि पैर बंटाती हैं. वह खुद अपना बैग उठाती हैं, सूई में धागा डालती हैं, सिलाई करती हैं, पेंटिंग बनाती हैं और कागज से सजावटी सामान तैयार करती हैं. मानसी की माँ बताती हैं कि उसे तरह तरह की चीजे खाने का बहुत पसंद है वो घर पर ही पास्ता, ब्रेड के कालाजामुन और बहुत कुछ बनाती है.

दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद मानसी ने ये साबित कर दिया है कि तकदीर हाथों में नहीं, बल्कि हौसलों में होती है. उनका संघर्ष उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात के आगे हार मान लेते हैं.

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