Child Phone Addiction: बिना फोन देखे बच्चे नहीं खाते खाना? तो इस उपाय से छुड़वाएं ये आदत.. लेकिन शुरुआत करें खुद से

आजकल के बच्चों में आदत पैदा हो चुकी है कि वह फोन काफी ज्यादा देखते हैं. इसका असर उनकी मानसिक सेहत पर काफी बुरा पड़ता है. ऐसे में उनकी इस आदत को छुड़वाने के लिए आप इस एक ट्रिक को अपना सकते हैं.

Child Reading Book (AI Generated Image)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:52 PM IST

आज के समय में बच्चों को फोन इस्तेमाल करने की लत काफी ज्यादा लग चुकी है. यहां तक कि उन्हें खाना खाते समय भी फोन देखना जरूरी होता है. लेकिन फोन का उनपर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है. पहले तो फोन से निकलने वाली किरणें उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं. दूसरा फोन देखने से उनका फोकस भी कम होता है. तीसरा वह फोन देखने में समय केवल बर्बाज करते हैं, जबकि इस समय का इस्तेमाल वह किसी प्रोडक्टिव काम के लिए कर सकते हैं. बच्चों की आदत में अगर आप सुधार करना चाहते हैं तो इसकी शुरुआत पहले तो आप खुद से ही करनी पड़ेगी, साथ ही कुछ अन्य चीज़ों में भी बदलाव की जरूरत है.

लाएं खुद में बदलाव
बच्चे सबसे पहले तो आप से ही सीखते हैं. इसलिए जरूरी है कि पहले तो आप खुद फोन का इस्तेमाल करना कम करें. साथ ही खाना खाते समय फोन को बिलकुल भी इस्तेमाल न करें. आपको देख कर ही बच्चे भी फोन से दूरी बनाएंगे.

इसके अलावा अगर आप खाली समय में किसी किताब को पढ़ना शुरू कर सकते हैं. आपके बच्चे भी आपकी इसी आदत को अपनाने लगेंगे. ऐसे में वह किसी ऐसी किताब को पढ़ें, जिससे उन्हें कुछ नया सीखने को मिली. ऐसा करने से उनका ज्ञानवर्धवन भी होता है.

बच्चों के लिए बनाएं रीडिंग कॉर्नर
बच्चों को अगर रीडिंग की आदत डाल रहे हैं, तो उनके लिए एक खास कोना बनाएं, जहां उनकी पसंदीदा किताबें हो और जगह एकांत हो. ऐसी जगह जगह रीडिंग करने से उनका फोकस भी बढ़ेगा. साथ ही वह शांति के साथ कुछ पढ़ पाएंगे.

साथ ही उन्हें एक आदत जरूर डालें कि वह सोने से पहले रीडिंग जरूर करें. सुनने में तो यह काफी मामूली बात लगती है, लेकिन ऐसा करने से उनकी नींद में सुधार होगा, जिससे उनका संपूर्ण रूप से विकास होगा. साथ ही वह जब सुबह उठेंगे तो एकदम फ्रेश फील करेंगे.

बचपन से ही डाले रीडिंग हैबिट
कहते हैं कि जो आदतें बचपन में पड़ जाती है, वह जीवन भर साथ रहती हैं. ऐसे में उन्हें बचपन से ही रीडिंग की आदत डाल दें. बेशक फिर चाहे वह केवल रंगीन तस्वीरों वाली किताब ही क्यों न हो. अगर अंग्रेजी भी पढ़ा रहे हैं तो ऐसी किताबें लाएं तो दिखने में भी रोचक हों. साथ ही कंटेंट भी ऐसा हो जिसको पढ़ने का बच्चे का मन करे.

 

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