Temple Management Course
Temple Management Course
मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक नई पहल सामने आई है. जहां अब एमबीए में 'टेंपल मैनेजमेंट' का कोर्स शुरू होने जा रहा है. लेकिन इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है. सरकार इसे धार्मिक पर्यटन और रोजगार से जोड़ रही है. लेकिन विपक्ष इसे प्राथमिकताओं से भटकाव बता रहा है.
टेंपल मैनेजमेंट का कोर्स-
उज्जैन अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं… बल्कि मैनेजमेंट की पढ़ाई में एक नई पहल करने जा रहा है. उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में एमबीए टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत की जा रही है. सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दावा किया कि इससे मंदिरों का बेहतर संचालन होगा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. क्योंकि उज्जैन से इस कोर्स की शुरुआत हम कर रहे हैं, वहां बड़ी संख्या में मंदिर है और इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मार्ग खुलेंगे. मंदिर की व्यवस्थाओं से लेकर प्रबंधन तक को इस कोर्स में शामिल किया जाएगा. फिलहाल तो इसका प्रारूप हम बना रहे हैं. जल्द ही सामने होगा कि इस कोर्स को किस तरह से तैयार किया जाए.
पेशेवर तरीके से सिखाया जाएगा मैनेजमेंट-
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अब तक मंदिरों का प्रबंधन पारंपरिक तरीकों से होता रहा. लेकिन अब वैज्ञानिक और पेशेवर दृष्टिकोण से मैनेजमेंट सिखाया जाएगा. जिसमें संरक्षण, संधारण, आर्थिक प्रबंधन और सामाजिक पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित होगा. सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बताया कि जुलाई से शुरू होने वाले इस कोर्स के लिए अभी से आवेदन और पूछताछ शुरू हो चुकी है. विश्वविद्यालय प्रबंधन के मुताबिक सिर्फ उज्जैन ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी छात्र इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम एमबीए टेंपल मैनेजमेंट का कोर्स शुरू कर रहे हैं.
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की पहल-
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मध्य प्रदेश में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ऐसा पहला विश्वविद्यालय है, जो इस पाठ्यक्रम को प्रारंभ करने जा रहा है. मुख्यमंत्री की जो योजना होती है, जिस प्रकार से वे शैक्षणिक संस्थाओं के बारे में सोचते हैं, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय सदैव अग्रणी रहा है, चाहे राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन हो, चाहे बीएससी एग्रीकल्चर खोलना हो, पहले कृषि पाठ्यक्रम जो हैं, वह सीमित होते थे. मुख्यमंत्री जब शिक्षा मंत्री हुआ करते थे, तब उन्होंने इस दायरे को बड़ा करके सभी विश्वविद्यालय में कृषि विषय कृषि पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की पहल शुरू की, जो कि अब सभी विश्वविद्यालयों ने अपनाई है. उसी तर्ज पर चलते हुए उन्होंने घोषणा की है कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय टेंपल मैनेजमेंट में भी एमबीए का कोर्स करवाएगा.
देवभूमि है मध्य प्रदेश- विश्वविद्यालय प्रशासन
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अभी तक जो हमारे मंदिर हैं, देवस्थान हैं, मध्य प्रदेश देवभूमि है, ओंकारेश्वर का नाम लीजिए, आप उज्जैन, ओरछा का नाम लीजिए आप ऐसा अनेक स्थान हैं, जो कि अपने देवस्थान के रूप में चिन्हित है और काफी विख्यात हैं, परंतु इन मंदिरों का, इन देवस्थानों का प्रबंधन बहुत समुचित वैज्ञानिक विधि से नहीं हो रहा था. समुचित व्यवस्थापन की दृष्टि से वहां पर और कुछ भी किए जाने की आवश्यकता थी और उसके लिए एक प्रशिक्षित मानव बल जो चाहिए था. वह अभी तक उपलब्ध नहीं था. मध्य प्रदेश में तो यह विश्वविद्यालय टेंपल मैनेजमेंट चलाएगा, तो एक नई शुरुआत होगी, युवाओं को मंदिरों को एक नई दृष्टि से वह देखेंगे, मंदिरों का संरक्षण उनका संधारण, उनका परीक्षण, उनका व्यवस्थाप,न उनका आर्थिक पक्ष उनका सामाजिक पक्ष का आध्यात्मिक इन सभी पक्षों पर जो यह मैनेजमेंट का कोर्स है, यह चर्चा करेगा.
प्रशासन का कहना है कि मंदिरों को देवस्थान के रूप में हमने पूजा, लेकिन में पूजन के साथ बेहतर व्यवस्थापन के भी वहां पर गुंजाइश है और उस दिशा में यह जो विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम को करेंगे, ये इन स्थानों की गरिमा को बढ़ाएंगे. क्योंकि पाठ्यक्रम हम लोग जुलाई में शुरू करने वाले हैं, काफी इंक्वारी आ रही है, केवल उज्जैन से नहीं अन्य स्थानों से भी, बल्कि काफी प्रतिशत व्यक्ति भी इस पाठ्यक्रम को करना चाहते हैं. ताकि यह जान सकें कि किस प्रकार से एक बेहतर मंदिर प्रबंध किया जा सकता है और किस तरह मंदिरों की पवित्रता उनकी उनके जो उत्कृष्ट है उसको और भी बेहतर बनाया जा सके.
विवाद भी शुरु-
हालांकि टेंपल मैनेजमेंट कोर्स को लेकर विस्तृत गाइडलाइन्स अभी आना बाकी है. एक तरफ जहां हिंदू संगठन सरकार की इस पहल की तारीफ कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस इसपर सवाल खड़े कर रही है. कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि रोजगारन्मुखी कोर्सेस की बजाय सरकार धार्मिक एजेंडे पर चल रही है. पीसी शर्मा ने कहा कि सरकार पहले यह बताए कि हिंदी में एमबीबीएस और अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय से कितने लोगों को रोजगार मिला है.
आस्था और अकादमिक के इस नए प्रयोग पर बहस तेज है. एक तरफ इसे रोजगार और बेहतर प्रबंधन का मॉडल बताया जा रहा है तो दूसरी तरफ इसे शिक्षा की प्राथमिकताओं में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. अब देखना होगा क्या 'टेंपल मैनेजमेंट' युवाओं के करियर को नई दिशा देगा या नहीं.
(रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट)
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