दिल्ली में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार सबसे ज्यादा वोट दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले से कटे हैं. यहां 6.79 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. प्रतिशत के मामले में भी दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिला सबसे ऊपर है, जहाँ करीब 43.62% वोट कटे हैं. पश्चिमी दिल्ली में तुलनात्मक रूप से कम यानी करीब 26.69% नाम ही हटाए गए हैं.
नाम कटने की क्या हैं वजहें?
वोटरों के नाम कटने के मुख्य कारण मतदाताओं का पिछले एसआईआर की सूची के मुताबिक मैपिंग या मिलान न हो पाना है. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, घर-घर जाकर किए गए मतदाता के सत्यापन अभियान के बाद इस ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटाए गए हैं. आयोग के मुताबिक ASDDF कैटेगरी यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Foreigners के तहत हटाए गए 47.5 लाख से अधिक मतदाताओं में से लगभग 43.3 लाख लोग ऐसे पाए गए, जो या तो अपने पते से स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए यानी कहीं और चले गए हैं. वो वेरिफिकेशन के समय अनुपस्थित मिले, लिहाजा या तो फॉर्म ले नहीं सके या फिर भर कर जमा नहीं किया.
इसके अलावा मृतकों और एक से अधिक जगह की मतदाता सूची में नाम दर्ज हैं यानी डुप्लीकेट नामों को हटाया गया है.
झुग्गियों या बस्तियों का हटना भी बड़ा कारण-
अवैध निर्माण ध्वस्त और झुग्गियों या बस्तियों का हटना भी बड़ा कारण है. कई इलाकों में अवैध निर्माण गिराए जाने और झुग्गी बस्तियों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किए जाने के कारण लोग वहां से नई आवंटित जगहों पर चले गए हैं. वहां उन्होंने वोटर लिस्ट में नाम नहीं डलवाए या प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए. इससे उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया. कम वोटिंग वाले क्षेत्रों पर भी फोकस है. जिन विधानसभा क्षेत्रों में 2025 के चुनावों में सबसे कम वोटिंग हुई थी, वहाँ डिजिटल वेरिफिकेशन की दर दिल्ली के औसत (67%) से काफी कम रही.
किन तबकों के लोगों के वोटर ज्यादा कटे- इस पूरे मामले पर दिल्ली में भारी राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है. पार्टियों के अलग-अलग अपने अपने दावे हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) का दावा है कि सत्ताधारी पार्टी जान बूझ कर उन इलाकों को निशाना बना रही है, जहाँ गरीब, मजदूर, दलित-मुस्लिम और प्रवासी आबादी रहती है. उनका दावा है कि झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 50% घरों तक वेरिफिकेशन फॉर्म पहुँचा ही नहीं.
यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया- बीजेपी
वहीं, बीजेपी ने विपक्षी दलों के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया है. इसका उद्देश्य फर्जी और अवैध प्रवासियों के नाम हटाकर वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है. सबसे अधिक प्रभावित विधानसभा क्षेत्र (प्रतिशत के आधार पर)दिल्ली की जिन सीटों पर सबसे ज़्यादा प्रतिशत में वोट कटे हैं, उनमें मुख्य रूप से गरीब और अनधिकृत कॉलोनियों वाले क्षेत्र शामिल हैं. तुगलकाबाद 47.85% दर के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित है.
ओखला में 45 फीसदी से ज्यादा वोट कटे-
दूसरे नम्बर पर ओखला में 45.33% यानी करीब 1.63 से 1.82 लाख वोट कटे हैं. कस्तूरबानगर में 44.03%, बदरपुर में 42.67% वोटर घटे हैं.
हालांकि यह अभी केवल एक ड्राफ्ट लिस्ट है. यदि आपका या आपके किसी परिचित का नाम कट गया है, तो चुनाव आयोग ने 30 सितंबर 2026 तक जरूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने का मौका दिया है. अंतिम और संशोधित वोटर लिस्ट 4 नवंबर 2026 को जारी की जाएगी.
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