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Gujarat Elections 2022: AAP के सीएम फेस Isudan Gadhvi के khambhalia Assembly Seat का क्या है सियासी समीकरण, जानिए

khambhalia Assembly Constituency: आम आदमी पार्टी के सीएम फेस Isudan Gadhvi का खंभालिया विधानसभा क्षेत्र हॉट सीट बन गया है. इसकी खूब चर्चा हो रही है. इस सीट पर 50 सालों से यादव समुदाय का दबदबा है. गढ़वी के सामने यादव वर्चस्व तोड़ने की चुनौती है. इस सीट पर मौजूद विधायक कांग्रेस के विक्रम मैडाम हैं.

आम आदमी पार्टी के सीएम फेस इसुदान गढ़वी
शशिकांत सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 21 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST
  • खंभालिया सीट से मैदान में है इसुदान गढ़वी
  • 50 सालों से है यादव समुदाय का दबदबा

गुजरात विधानसभा चुनाव में कई फेमस सीटों की चर्चा है. इसमें पीएम मोदी के पैतृक घर से लेकर अमित शाह के पुश्तैनी घर वाली सीट की खूब चर्चा हो रही है. इस कड़ी में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार इसुदान गढ़वी की सीट भी चर्चा में आ गई है. आम आदमी पार्टी ने गढ़वी को खंभालिया सीट से मैदान में उतारा. इस विधानसभा इलाके में ही इसुदान गढ़वी का गांव भी आता है. गढ़वी के लिए इस विधानसभा सीट से जीत हासिल करने के लिए काफी मेहनत करनी होगी, क्योंकि पिछले 50 सालों से इस सीट से यादव समुदाय को छोड़कर कोई भी नहीं जीता है और इसुदान पिछड़ी चारण जाति से ताल्लुक रखते हैं.

पिपलिया गांव में गढ़वी का घर-
आम आमदी पार्टी ने पेशे से पत्रकार रहे इसुदान गढ़वी को सीएम फेस बनाया है. इसुदान पिपलिया गांव के रहने वाले हैं, जो खंभालिया विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है. जब से AAP ने गढ़वी को सीएम फेस बनाया है, इस सीट की चर्चा हर तरफ होने लगी है. विधानसभा में अहीर (यादव) समुदाय की संख्या ज्यादा है. जबकि इसुदान चारण जाति से आते हैं. इसुदान के गांव में ब्राह्मणों की संख्या भी है. लेकिन सबसे ज्यादा अहीर समुदाय के लोग हैं. 

क्या है सियासी समीकरण-
खंभालिया विधानसभा इलाके में 129 गांव और 3 नगर पालिका है. इसमें वोटिंग के लिए 335 बूथ हैं. अगर वोटों की बात करें तो सबसे ज्यादा यादव समुदाय के वोट हैं. जिनकी वोटर्स 52 हजार के आसपास हैं. जबकि इस इलाके में मुस्लिम वोटर्स की संख्या भी ज्यादा है. यादव के बाद सबसे ज्यादा मु्स्लिम वोटर्स हैं. खंभालिया में सत्वारा तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला समुदाय है. सत्वारा समुदाय के 35 हजार मतदाता हैं. दलितों की आबादी भी ठीक-ठाक है. 18 हजार वोटर दलित समुदाय के हैं. जबकि गढ़वी और राजपूत समाज के सिर्फ 15 हजार वोटर्स हैं. इसके अलावा दूसरी जातियों के वोटर्स भी 15 हजार के आसपास हैं.

खंभालिया का क्या है सियासी इतिहास-
खंभालिया का सियासी इतिहास यादव समुदाय के इर्द-गिर्द घूमता है. पिछले 50 सालों से यादव समुदाय के बाहर का कोई भी विधायक नहीं बन पाया है. साल 1972 से इस सीट पर यादव समुदाय का कब्जा है. उस वक्त इस समुदाय के हेमंत मडाम ने इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ा था और कांग्रेस की उम्मीदवार नाकुम को हराया था. हेमंत ने लगातार तीन बार निर्दलीय इस सीट से जीत हासिल की थी.

2017 में किसके बीच था टक्कर-
साल 2017 विधानसभा चुनाव में खंभालिया से कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत हुई थी. कांग्रेस के विक्रमभाई अर्जनभाई मडाम ने बीजेपी के कालूभाई नरेनभाई चावड़ा को 11 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. कांग्रेस उम्मीदवार को 79 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 68 हजार के आसपास वोट मिले थे. 

इस सीट पर बीजेपी का रहा है दबदबा-
ज्यादातर इस सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा है. साल 2012 में बीजेपी की पूनमबेन मडाम ने 38 हजार से ज्यादा वोटों स जीत हासिल की थी. जबकि साल 2007 में बीजेपी के ही कंजारिया मेघजी दया ने कांग्रेस ने डॉ. वरोतारिया रणमलभाई नाथभाई को सिर्फ 798 वोटों से मात दी थी. साल 2002 के चुनाव में भी कांग्रेस ने टक्कर दी थी. लेकिन बीजेपी के चावड़ा करूभाई नारन ने कांग्रेस के डॉ. रणमलभाई नाथभाई को 1873 वोटों से हरा दिया था. जहां तक 1998 चुनाव की बात है तो बीजेपी के उम्मीदवार ने 11 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी.

किस पार्टी ने किसपर लगाया है दांव-
खंभालिया में आम आदमी पार्टी की तरफ से सीएम उम्मीदवार इसुदान गढ़वी किस्मत आजमा रहे हैं. वो जोरशोर से प्रचार भी कर रहे हैं औ इस बार रिवाज बदलने का दावा कर रहे हैं. बीजेपी ने खंभालिया ने मूलुभाई बेरा पर दांव लगाया है. जबकि कांग्रेस ने मौजूदा विधायक विक्रम मैडाम पर दांव लगाया है. 

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