4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे हैं. तमिलनाडु में पहली बार चुनावी मैदान में उतरे एक्टर विजय यानी जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने बंपर जीत हासिल की है. विजय की पार्टी TVK 100 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर रहे हैं. पार्टी बनाने के बाद पहले ही चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने वाले लीडर सिर्फ एक्टर विजय ही नहीं हैं. इससे पहले भी ऐसा कारनामा की लीडर्स कर चुके हैं. इसमें एनटीआर, एमजीआर, अरविंद केजरीवाल से लेकर प्रफुल्ल महंत तक का नाम शामिल है.
विजय की बंपर ओपनिंग-
एक्टर विजय की सियासत में बंपर ओपनिंग हुई है. विजय की पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. सूबे में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है. माना जा रहा है कि विजय की पार्टी बहुमत हासिल कर लेगी या बहुमत के काफी करीब रहेगी.
पार्टी बनाने के 9 महीने बाद NTR का जलवा-
मशहूर फिल्मी एक्टर एनटी रामाराव ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की थी. एनटीआर ने 29 मार्च 1982 को तेलुगु देशम पार्टी (TDP)बनाई थी. पार्टी बनने के 9 महीने बाद आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए. पार्टी ने पहले ही चुनाव में दो-तिहाई सीटों पर जीत हासिल की. साल 1983 में हुए विधानसभा चुनाव में टीडीपी ने 294 सीटों में से 201 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस प्रचंड जीत के बाद एनटीआर मुख्यमंत्री बने थे.
एमजीआर की प्रचंड जीत-
फिल्म एक्टर एमजीआर ने साल 1972 में डीएमके से अलग होकर AIADMK बनाई थी. साल 1977 विधानसभा चुनाव में एमजीआर की पार्टी ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 सीटों पर चुनाव लड़ा और 130 सीटों पर जीत दर्ज की थी. एआईएडीएमके के साथ 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही सीपीआई को 12 सीटों पर जीत मिली थी. इस चुनाव एआईएडीएमके को 30.36 फीसदी वोट मिले थे. इस तरह से एमजीआर की पार्टी AIADMK ने पहले चुनाव में ही बंपर जीत दर्ज की थी और एमजीआर मुख्यमंत्री बने थे.
केजरीवाल का कमाल-
अन्ना हजार के आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल ने साल 2013 में राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी बनाई थी. इसके बाद साल 2013 में अपने पहले ही चुनाव में पार्टी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 20 दिसंबर 2013 को केजरीवाल मुख्यमंत्री बने. हालांकि बहुमत नहीं होने पर 49 दिनों में इस्तीफा देना पड़ा था. लेकिन जब दोबारा चुनाव हुए तो AAP को प्रचंड बहुमत मिला था और केजरीवाल फिर से सीएम बने थे.
प्रफुल्ल महंत-
साल 1979 में असम में आंदोलन शुरू हुआ था. ये आंदोलन 6 साल तक चला. उस दौर में प्रफुल्ल महंत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष थे. जब आंदोलन खत्म हुआ और साल 1985 में असम समझौता हुआ. इसके बाद इसी साल असम गण परिषद की स्थापना हुई. प्रफुल्ल महंत को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया. इसी साल यानी 1985 में विधानसभा चुनाव हुए. जिसमें असम गण परिषद को प्रचंड बहुमत मिला. 126 सीटों वाले विधानसभा में AGP को 64 सीटों पर जीत मिली थी. इसके बाद प्रफुल्ल महंत मुख्यमंत्री बने थे.
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