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90 फीसदी स्ट्राइक रेट, बंगाल चुनाव में ब्रांड योगी का असर

पश्चिम बंगाल में ब्रांड योगी की खूब चर्चा हुई. यूपी के सीएम योगी ने बंगाल चुनाव में 35 से ज्यादा सभाएं की और इसमें से 31 सीटें बीजेपी जीतने में सफल रही, यानी अगर स्ट्राइक रेट की बात की जाए तो यह स्ट्राइक रेट लगभग 90 फीसदी रहा है.

Yogi Adityanath in West Bengal (PTI Photo)
कुमार अभिषेक
  • लखनऊ,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:37 PM IST

पश्चिम बंगाल की इस बंपर जीत का श्रेय संगठन और शीर्ष नेताओं के खाते में जाता है. प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से लेकर शुभेंदु अधिकारी तक बंगाल में जीत के चेहरे बन गए हैं. लेकिन एक नाम, जिनके अपने ब्रांड ने बंगाल चुनाव में अलग असर छोड़ा, वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है.

बंगाल में ब्रांड योगी की चर्चा!
यूं तो हर प्रदेश में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभाओं की मांग होती है और प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के बाद सबसे ज्यादा स्टार प्रचारक के तौर पर योगी की ही सभाएं होती हैं. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए पश्चिम बंगाल चुनाव बेहद खास था.

ब्रांड योगी बंगाल में भी चला, सभाओं में आई भीड़, चुनाव में मिली जीत और योगी की सभाओं के स्ट्राइक रेट काफी कुछ बयां करते हैं. बंगाल चुनाव में योगी ने जिस विमर्श को उत्तर प्रदेश में बढ़ाया है, इसका असर बंगाल में उनकी सभा में भी दिखा. बुलडोजर और अपराधियों के एनकाउंटर के चर्चे बंगाल चुनाव के विमर्श में भी छाए रहे.

सीएम योगी का स्ट्राइक रेट 90 फीसदी-
सीएम योगी ने बंगाल चुनाव में 35 से ज्यादा सभाएं की और इसमें से 31 सीटें बीजेपी जीतने में सफल रही, यानी अगर स्ट्राइक रेट की बात की जाए तो यह स्ट्राइक रेट लगभग 90 फीसदी रहा है. यह भी सच है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ज्यादातर सभाएं ऐसे क्षेत्रों में लगी थी, जहां मुसलमान की आबादी भी काफी ज्यादा थी. वे टीएमसी के गढ़ थे और बगैर पोलराइजेशन के ये सीटें जीतना आसान नहीं था. ऐसे में 90 फीसदी का स्ट्राइक रेट शानदार कहा जाएगा.

दोनों फेज में सीएम योगी की सभाएं-
पहले चरण के चुनाव में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों की कई विधानसभाओं में योगी की सभाएं थी तो दूसरे चरण में दमदम, कोलकाता और आसनसोल में योगी  की सभाओं ने सियासी समां बांधा.

सीएम योगी ने गोपालपुर, राजारहाट, धानेखाली, जॉयपुर उदयनरायणपुर, सोनामुखी, कांथी, रामपुरहाट, माथाभंगा बोलपुर, नवदीप , कटवा ,बागदा नंदकुमार, धुपगुडी, धाने खाली जैसे क्षेत्रम सभाऐं की. बांकुरा दमदम कल्याणी में इन्होंने बड़े रोड शो किए.

सुवेंदु अधिकारी ने छुए योगी के पैर-
बंगाल चुनाव में योगी की डिमांड का अंदाजा इसी बात से लगाइए की खुद सुवेंदु अधिकारी ने भाजपा नेतृत्व से सीएम योगी की सभाएं ज्यादा से ज्यादा लगाने की मांग और जब सुवेंदु के मंच पर योगी आए तो सुवेंदु अधिकारी ने योगी आदित्यनाथ के चरण छू लिए, पैर छूने को लेकर जब उनकी आलोचना शुरू हुई तो शुभेंदु अधिकारी ने कहा की योगी सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं है, वह नाथ सप्रदाय के सबसे बड़े पीठाधीश्वर भी हैं. इसलिए उनके चरण छूने को एक महंत को प्रणाम और उनके सम्मान के तौर पर देखा जाना चाहिए.

सीएम योगी बंगाल जाने के पहले उन्होंने यूपी से ही बंगालियों को साधने की शुरुआत कर दी थी. बांग्लादेश बंटवारे के लखीमपुर में आकर बसे हजारों बंगाली हिंदू परिवारों को रहने को जगह तो मिल गई थी. लेकिन उन्हें जमीन का मालिक आना हक नहीं मिला था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंगाल चुनाव शुरू करने के पहले वह लखीमपुर के उसे हिंदू बंगाली गांव में पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले उसका नाम मियांपुर से बदलकर रविंद्र नगर कर दिया और 1600 हिंदू शरणार्थी बंगाली परिवारों को जमीन का मालिक आना हक दिया. जमीन के दस्तावेज सौंपे और उसके बाद बंगाल चुनाव प्रचार की शुरुआत की.

बीजेपी शानदार तरीके से चुनाव जीत चुकी है. प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बंगाल में आसमान छू रही है. ऐसे में उत्तर प्रदेश से निकले दो चेहरों योगी  आदित्याथ और सुनील बंसल ने बंगाल चुनाव में कितना असर डाला है. यह सब की जुबान पर है.

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