Advertisement

Tamil Nadu Election 2026: क्यों राजनीति में बार-बार सिनेमा को तरजीह देता है तमिलनाडु.. आखिर क्यों दर्शक बन जाते हैं वोट बैंक?

तमिलनाडु की राजनीति में अक्सर देखा जाता रहा है कि फिल्मी चेहरों को काफी चुनावी मैदानों में उतारा जाता है. हैरानी की बात यह है कि यह चेहरों चुनावी रण में तुरुप का इक्का साबित होते हैं.

Vijay
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

तमिलनाडु की राजनीति में ऐसा पैटर्न देखने को मिलता है, जिसमें सिनेमा को बार-बार तरजीह दी जाती रही है. यहां की पॉलिटिक्स में फिल्मी सितारों को सीधा वोट बैंक में तब्दील कर दिया जाता है. यहां के फिल्मी नायक रियल दुनिया में काफी प्रभावशाली चेहरे बनकर उतरे हैं. इसमें नाम चाहे कमल हसन का हो, या रजनीकांत का, या फिर विधानसभा 2026 के चुनावों में थलापति विजय का. तमिल में एमजीआर और जयललिता जैसे सितारों ने अपनी छवि को सत्ता में बदला, जहां राज्य के कई मुख्यमंत्रियों का फिल्म बैकग्राउंड रहा है.

तमिल की राजनीति में सिनेमा का डायरेक्ट इम्पैक्ट 1950-60 के दशक से ही देखने को मिला है. द्रविड़ आंदोलन के नेता जिसमें सीएन अन्नादुराई ने केवल आम जन के लिए मनोरंजन का काम ना करते हुए वैचारिक प्रचार का भी काम किया. उन्होंने फिल्मों के जरिए सामाजिक न्याय, ब्राह्मणवाद विरोध और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाया गया. यह वह दौर था जब सिनेमा ने राजनीति के लिए जमीन तैयार की और दर्शक धीरे-धीरे मतदाता में बदलने लगे. इसी दौर ने तमिलनाडु में राजनीति की भाषा और शैली को स्थायी रूप से बदल दिया.  

तमिल की फिल्मों के बोल ने छुएं दिल
आम जन के लिए तमिल की फिल्मों के बोल ने सिर्फ मनोरंजन का काम नहीं किया. यहां फिल्मों के संवाद, गीत और किरदार ने आम जन को सोसाइटी का चेहरा दिखाया और राजनीति के संदेशों को फिल्मों के लिए समाज में पहुंचाया. यही कारण है कि  सिनेमा हॉल राजनीतिक विमर्श के नए मंच बन गए. जहां विचारधारा सहज और प्रभावी ढंग से पहुंचती थी.

पर्दे से उतर एमजीआर बने लोगों के मसीहा
तमिल की फिल्मों में एक बड़ा नाम रहे हैं एमजी रामाचंद्रन, जिन्हें एमजीआर के नाम से भी काफी जाना जाता है. दरअसल उसकी राजनीत की यात्रा भी द्रविड़ आंदोलन से ही शुरू हुई. फिल्मों में उन्होंने गरीबों के मसीहा के तौर पर काफी अच्छआ किरदार निभाया. जब वह राजनीति में उतरे तो उनके उसी फिल्मी चेहरे ने लोगों की पसंद बनाया, और आम जन उनके लिए वोट बैंक में आसानी से तब्दील हो गया. पहले वह DMK का हिस्सा रहे, लेकिन 1972 में एमजीआर ने DMK से अलग होकर AIADMK की स्थापना की. 

अपनी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को खुलकर उठाने वाले कमल हसन ने 2018 में MNM पार्टी की स्थापना की. उन्होंने भ्रष्टाचार विरोध, पारदर्शिता और शहरी प्रशासन जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा. ये वही मुद्दे थे जिन्हें वह अपनी फिल्मों में उठाते हुए दिखते थे. 

तमिलनाडु में पहली बार चुनावी मैदान में उतरे एक्टर विजय यानी जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने बंपर जीत हासिल की है. विजय की पार्टी TVK 100 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर रहे हैं. पार्टी बनाने के बाद पहले ही चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने वाले लीडर सिर्फ एक्टर विजय ही नहीं हैं. इससे पहले भी ऐसा कारनामा कई लीडर्स कर चुके हैं.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement