कान फिल्म फेस्टिवल में रेड कार्पेट पर जलवा बिखेरने वाले सितारों की चर्चा तो आपने खूब सुनी होगी, लेकिन अब बात एक ऐसी भारतीय महिला की, जिसने ग्लैमर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. कभी साधारण जिंदगी जीने वाली मायूरी मित्तल आज इंटरनेशनल मंच पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं. उनकी सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. मयूरी मित्तल ने कान तक पहुँचने का सपना 28 साल पहले देखा गया था, इस सपने को एक पेंटिंग का रूप भी दिया गया था.
इस पेंटिंग को मयूरी ने तब बनाया था, जब वो सिर्फ 12 साल की थी. उस वक्त उन्हें रेड कार्पेट का मतलब तक नहीं पता था. लेकिन इस पेंटिंग ने शायद अपनी और मयूरी की किस्मत तय कर ली थी.
मयूरी बताती हैं कि उन्हें कान फिल्म फ़ेस्टिवल से इनविटेशन आया था. दरअसल कुछ साल पहले मयूरी ने एक ब्यूटी पेजेंट की शुरुआत की थी. इस ब्यूटी पेजेंट की ख़ास बात ये थी कि इसका पैमाना बाहरी ख़ूबसूरती न होकर अंदरूनी ख़ूबसूरती थी.
इस पेजेंट में उन लोगों को प्रतिभागी बनाया गया, समाज की सेट की गई सुंदरता की परिभाषा से परे थीं. इनमें हिस्सा लेने वाली लड़कियां वो थीं, जिनके चेहरे पर दाग थे, कोई दिव्यांग थी तो कोई एसिड अटैक सर्वाइवर.
मयूरी का ये कॉन्सेप्ट ग्लोबली बहुत मशहूर हुआ. पहले ही साल इसे वोग जैसी बड़ी फैशन मैगजीन में जगह मिली और यही उनके इन्विटेशन का कारण बना.
कान का सफर मयूरी के लिए किसी सपने जैसा घट रहा था. वो बताती हैं कि उनका वीजा ही नहीं लग रहा था. एक वक्त पर वो हार मान बैठी थीं. लेकिन जाने के ठीक एक दिन पहले उनका वीजा लग गया. अब तक उन्होंने ड्रेस तैयार नहीं की थी. जल्दबाजी में उन्होंने अपनी उसी पेंटिंग को अपनी ड्रेस का सबसे अहम हिस्सा बना लिया.
कान फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट तक पहुंचना आसान नहीं माना जाता. दुनिया भर के फिल्मकार, कलाकार और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. ऐसे में मायूरी मित्तल की मौजूदगी भारतीय महिलाओं की बढ़ती वैश्विक पहचान की मिसाल बन गई है. वो कहती हैं कि पहली बार तो लगा जैसे कोई स्कैम है.
मयूरी बताती हैं कि घरवाले और रिश्तेदारों को पहले तो समझ ही नहीं आया कि मैं कहां और क्यूँ जा रही हूँ. एक महिला के रूप में लोग आपसे अपेक्षा नहीं करते कि आप अपने सपनों के पीछे भागें, मुझे भी बहुत सारे लोगों ने रोका.
सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े इरादों की जरूरत होती है. मायूरी मित्तल की कहानी यही बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता और मंजिल दूर नहीं रहती.