चंद्रपुर में शनिवार को एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जब सौम्या ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के हजारों छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर विश्व शांति का संदेश दिया. 'हमें युद्ध नहीं, शांति चाहिए' के उद्देश्य के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में 1381 प्रतिभागियों ने 100×100 के आकार में मानव श्रृंखला बनाकर दुनिया का सबसे बड़ा 'इंटरनेशनल पीस सिंबल' बनाया. यह उपलब्धि अब Guinness World Records में दर्ज हो चुकी है.
इससे पहले वर्ष 2019 में 1076 लोगों द्वारा बनाया गया पीस सिंबल विश्व रिकॉर्ड था, जिसे अब चंद्रपुर के छात्रों ने पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है. इस ऐतिहासिक मौके पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम भी मौजूद रही, जिसने पूरे आयोजन का निरीक्षण किया और इसे आधिकारिक मान्यता दी.
आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसे हालात, महंगाई और अस्थिरता बढ़ रही है, ऐसे माहौल में इस पहल का महत्व और भी बढ़ जाता है. खासकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस कार्यक्रम ने शांति और एकता का मजबूत संदेश दिया. सफेद पोशाक में सजे हजारों छात्रों ने जब एक साथ मानव शृंखला बनाई, तो ड्रोन से ली गई तस्वीरों में यह दृश्य बेहद आकर्षक और भावुक करने वाला नजर आया.
शांति और एकता का प्रतीक बनी पहल
यह इंटरनेशनल पीस सिंबल केवल एक आकृति नहीं, बल्कि इंसानियत, भाईचारे और एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरा. आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि शांति और सहयोग की जरूरत है. सोमय्या ग्रुप के चेयरमैन पांडुरंग आंबटकर ने इस मौके पर कहा कि यह पहल सिर्फ एक रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरी दुनिया तक शांति का संदेश पहुंचाना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रयास वैश्विक स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होंगे.
रिपोर्टर: विकास राजुरकर
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