गुजरात सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए बिजली टावर और हाई वोल्टेज बिजली लाइनों के लिए जमीन के मुआवजे की नई व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया है. अब किसानों को जंत्री (सरकारी गाइडलाइन) के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जमीन के मौजूदा बाजार भाव के दोगुने मूल्य के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को उनकी जमीन का अधिक उचित और पारदर्शी मुआवजा मिलेगा.
अब तक किसानों के खेतों से बिजली लाइन या खंभे गुजरने पर जंत्री की दोगुनी दर यानी 200 प्रतिशत के हिसाब से मुआवजा दिया जाता था. लेकिन किसान संगठनों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. नई नीति के तहत अब मुआवजे की गणना जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर होगी, जिससे किसानों को पहले की तुलना में अधिक लाभ मिलेगा.
टावर की जमीन पर भी मिलेगा ज्यादा मुआवजा
सरकार ने बिजली टावर के लिए दिए जाने वाले मुआवजे में भी बढ़ोतरी की है. पहले केवल टावर की नींव के वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर भुगतान किया जाता था. अब टावर के बेस क्षेत्र की हर दिशा में एक-एक मीटर अतिरिक्त जोड़कर मुआवजा दिया जाएगा. उदाहरण के तौर पर 765 केवी लाइन के लिए पहले 625 वर्ग मीटर के आधार पर भुगतान होता था, जिसे अब बढ़ाकर 729 वर्ग मीटर कर दिया गया है.
काम शुरू होने से पहले मिलेगा पूरा भुगतान
नई व्यवस्था के तहत किसानों को अब मुआवजा किस्तों में नहीं मिलेगा. पहले फाउंडेशन के समय 40 प्रतिशत, टावर खड़ा होने पर 40 प्रतिशत और तार बिछने के बाद 20 प्रतिशत भुगतान किया जाता था. अब सरकार ने तय किया है कि कार्य शुरू होने से पहले ही किसानों को 100 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा.
बाजार दर तय करेगी विशेष समिति
जमीन का सही बाजार मूल्य तय करने के लिए राज्य सरकार मार्केट रेट कमेटी (एमआरसी) का गठन करेगी. इस समिति में कलेक्टर, भूमि मालिकों के प्रतिनिधि, ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर के प्रतिनिधि और किसानों के अधिकृत मार्केट वैल्यूअर शामिल होंगे. समिति द्वारा तय बाजार मूल्य के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 30 प्रतिशत, नगर पालिका क्षेत्रों में 45 प्रतिशत और महानगर पालिका क्षेत्रों में 60 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से किसानों को पारदर्शी, समय पर और न्यायसंगत मुआवजा मिल सकेगा.
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