राजस्थान की गर्मी का नाम सुनते ही तपती सड़कें, झुलसाती हवाएं और 45 डिग्री के पार पहुंचता पारा याद आ जाता है. ऐसे मौसम में जहां इंसान घरों में कूलर और एसी की शरण लेते हैं, वहीं जयपुर के आमेर स्थित हाथी गांव में रहने वाले 75 हाथियों के लिए भी गर्मी से बचाव के विशेष इंतजाम किए गए हैं. सुबह तालाब में सामूहिक स्नान, दिनभर ठंडे फलों की दावत, कमरों में कूलर और नियमित स्वास्थ्य जांच के बीच यहां के हाथी गर्मी के मौसम को आराम से गुजार रहे हैं.
हाथी गांव की कहानी-
आमेर की पहाड़ियों के बीच बसा हाथी गांव सिर्फ हाथियों का ठिकाना नहीं, बल्कि इंसान और पशु के अनोखे रिश्ते की मिसाल भी है. यह भारत का पहला समर्पित हाथी गांव माना जाता है, जिसे हाथियों को बेहतर जीवन, सुरक्षित आवास और प्राकृतिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया था. यहां 15 से 50 वर्ष आयु वर्ग के कुल 75 हाथी रहते हैं. इनमें केवल दो नर हाथी हैं, जबकि बाकी सभी हथनियां हैं. सबसे खास बात यह है कि सभी हाथी एक बड़े परिवार की तरह साथ रहते, खेलते और अपना समय बिताते हैं.
हाथियों के लिए बदली गई समर डाइट-
गर्मी बढ़ने के साथ हाथियों के भोजन में भी बदलाव किया गया है. उनके शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और लौकी जैसी पानी से भरपूर चीजें खिलाई जा रही हैं. इसके अलावा सत्तू का घोल और नारियल पानी भी दिया जा रहा है. वहीं उनकी नियमित खुराक में गन्ना, ज्वार, रंजका और गेहूं का दलिया शामिल रहता है. यह विशेष डाइट हाथियों को ऊर्जा देने के साथ-साथ उन्हें गर्मी के प्रभाव से भी बचाती है.
सुबह तालाब, फिर स्नान और पूरे दिन ठंडक-
हाथी गांव में दिन की शुरुआत भी खास होती है. सुबह सभी हाथी समूह में तालाब की ओर जाते हैं, जहां वे पानी में समय बिताते हैं. इसके बाद उन्हें गार्डन क्षेत्र में अच्छी तरह नहलाया जाता है. दिन में दो से तीन बार स्नान करवाने की व्यवस्था की गई है, ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे.
इतना ही नहीं, हाथियों के कमरों और बाड़ों में कूलर लगाए गए हैं. तेज गर्म हवाओं के बीच ये कूलर उन्हें राहत पहुंचाते हैं. वन विभाग, पर्यटन विभाग और महावत मिलकर लगातार उनकी देखभाल कर रहे हैं.
काम कम, आराम ज्यादा-
भीषण गर्मी को देखते हुए हाथियों के काम के घंटे भी कम कर दिए गए हैं. अब उन्हें एक दिन आराम दिया जाता है और अगले दिन ही आमेर किले में पर्यटकों की सवारी के लिए भेजा जाता है. साथ ही नियमित मेडिकल चेकअप कैंप लगाए जाते हैं. पैरों में दरारें और अन्य समस्याएं न हों, इसके लिए नीम, सरसों और अन्य आयुर्वेदिक तेलों से मालिश भी की जाती है.
परिवार की तरह रखते हैं ख्याल-
हाथी गांव की सबसे भावुक तस्वीर यहां के महावतों और हाथियों के रिश्ते में दिखाई देती है. महावत उन्हें केवल जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानते हैं. किसी हाथी का जन्मदिन आने पर पूरे उत्साह से आयोजन किया जाता है. फर्क सिर्फ इतना होता है कि केक की जगह फलों की विशेष दावत दी जाती है, जिसका आनंद सभी हाथी मिलकर लेते हैं.
पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र-
हाथी गांव आज जयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए भी बड़ा आकर्षण बन चुका है. 108 रुपए के प्रवेश शुल्क के साथ पर्यटक यहां आकर हाथियों को खाना खिला सकते हैं, उनके साथ समय बिता सकते हैं, तस्वीरें खिंचवा सकते हैं और उनकी दिनचर्या को करीब से देख सकते हैं. विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग शुल्क निर्धारित है.
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