रक्षाबंधन पर आपने कई तरह की राखियां देखी होंगी, लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच में तैयार हुई यह राखी अपने आप में अनोखी है. 13 रुद्राक्षों पर बनी इस शिव राखी में सिर्फ कलाई सजाने की खूबसूरती नहीं, बल्कि भगवान शिव से जुड़ी आस्था और सूक्ष्म चित्रकला का अद्भुत संगम दिखाई देता है. इसमें त्योहार, भगवान की आस्था और कारीगरी तीनों का अनोखा मेल नजर आता है. इस राखी की सबसे खास बात यह है कि 12 रुद्राक्षों के बीच एक अलग रुद्राक्ष को केंद्र में रखा गया है. इसी केंद्रीय रुद्राक्ष पर मंदसौर स्थित प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ महादेव का सूक्ष्म चित्र उकेरा गया है. यानी 12 ज्योतिर्लिंगों के बीच मध्य प्रदेश की धार्मिक पहचान भी इस कलाकृति के केंद्र में दिखाई देती है.
12 रुद्राक्षों पर बनाए 12 ज्योतिर्लिंग
नीमच जिले के कुचड़ोद गांव के चित्रकार राहुल कुमार लोहार ने इस विशेष राखी में 12 अलग-अलग रुद्राक्षों पर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों के सूक्ष्म मिनिएचर चित्र उकेरे हैं. इनमें महाकाल, केदारनाथ, मल्लिकार्जुन, सोमनाथ सहित सभी 12 ज्योतिर्लिंग शामिल हैं. खास बात यह है कि जिन रुद्राक्षों पर ये चित्र बनाए गए हैं, उनकी सतह बेहद छोटी है. इसके बावजूद कलाकार ने अपनी बारीक कारीगरी से हर ज्योतिर्लिंग को पहचान देने की कोशिश की है.
एक-दो बालों वाले ब्रश से हुई चित्रकारी
इन चित्रों को बनाने के लिए राहुल ने किसी बड़े या सामान्य ब्रश का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने मात्र एक या दो बालों वाले बेहद महीन ब्रश से रुद्राक्षों पर चित्रकारी की. कैमरे की नजर से देखें तो छोटी-सी सतह पर ब्रश की हर हलचल और कलाकार की एकाग्रता इस काम की मुश्किल और बारीकी को बयां करती है.
गोलाकार रूप में सजाए गए 12 रुद्राक्ष
12 रुद्राक्षों को गोलाकार रूप में सजाया गया है. हर रुद्राक्ष अपने भीतर एक ज्योतिर्लिंग का सूक्ष्म चित्र समेटे हुए है. यानी एक नजर में पूरी राखी देखने पर यह सिर्फ रुद्राक्षों की माला नहीं, बल्कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों की एक कलात्मक प्रस्तुति नजर आती है.
धैर्य और एकाग्रता से तैयार हुई राखी
रुद्राक्ष जैसी छोटी और उभरी हुई सतह पर इतनी बारीक चित्रकारी करना सिर्फ हाथ की सफाई का काम नहीं है. इसके लिए धैर्य, एकाग्रता और बेहद सूक्ष्म नजर की जरूरत होती है. यही वजह है कि इस राखी में इस्तेमाल किए गए हर रुद्राक्ष की अपनी एक अलग कलात्मक पहचान नजर आती है.
कला और आस्था को एक साथ जोड़ती है शिव राखी
रक्षाबंधन पर राखी भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक होती है. लेकिन राहुल की यह शिव राखी उस परंपरा में कला और आस्था का एक नया रंग जोड़ती है. रुद्राक्ष, 12 ज्योतिर्लिंग, मंदसौर के पशुपतिनाथ और सूक्ष्म मिनिएचर पेंटिंग, इन सबको एक साथ पिरोकर तैयार की गई यह कलाकृति अपने आप में खास बन गई है.
13 रुद्राक्ष, 12 ज्योतिर्लिंग और केंद्र में पशुपतिनाथ महादेव की कलाकृति छोटी सी राखी में समाई. यह बड़ी कलाकारी रक्षाबंधन के त्योहार को सिर्फ एक धागे से नहीं, बल्कि भारतीय कला, आस्था और संस्कृति के रंगों से जोड़ती है.
राखी बनाने वाले न बताई बात
"जिस तरह का रक्षाबंधन का त्योहार है, पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है. एक कलाकार होने के नाते मैं नवाचार करता रहता हूं. उसी को देखते हुए मैंने भी एक राखी बनाने का विचार किया और राखी कुछ ऐसी, जिसमें कलात्मक दिखे, एक अनोखापन दिखे. तो यह अनोखी राखी भगवान शिव को समर्पित है.
यह अनोखी राखी इसलिए है कि देखिए, इसमें मैंने रुद्राक्ष के छोटे-छोटे बीजों के ऊपर भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों का स्वरूप बनाया है. जैसा कि आप देख सकते हैं, ऊपर भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, मल्लिकार्जुन, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, बैद्यनाथ, केदारनाथ ऐसे करके 12 ज्योतिर्लिंगों के एक समूह को बनाकर मैंने एक राखी का निर्माण किया है, एक कलाकार होने के नाते.
और विशेषता इसमें एक और जुड़ती है कि मैं मालवा क्षेत्र से आता हूं. तो यहां पर अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ विराजित हैं, जो कि मंदसौर में स्थित हैं. तो मैं 12 ज्योतिर्लिंगों को पूरे गोलाकार आकृति में बनाकर रुद्राक्ष के ऊपर महीन, बीच केंद्र में भगवान पशुपतिनाथ महाराज को स्थापित किया है. इस तरह से मैंने कलाकार होने के नाते सेवा की है और एक अनोखी राखी और नवाचार करने का प्रयोग किया है."
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