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12 साल तक नहीं मिली बिजली... मुख्यमंत्री के जनता दरबार ने 12 दिन में बदल दी परिवार की तकदीर

पश्चिम बंगाल के कृष्णा बाउरी के परिवार के लिए 12 साल तक इंतजार, दर्जनों आवेदन और लगातार निराशा के बाद आखिरकार जनता दरबार में पहुंची उनकी शिकायत रंग लाई. महज 12 दिनों में उनके घर बिजली का कनेक्शन लग गया और वर्षों बाद उनका आशियाना रोशनी से जगमगा उठा.

Purulia good news
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

बिजली आज हर घर की बुनियादी जरूरत है, लेकिन पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का एक परिवार ऐसा भी था जिसने पूरे 12 साल अंधेरे में गुजारे. कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाने और आवेदन देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. आखिरकार मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंची एक शिकायत ने परिवार की किस्मत बदल दी और महज 12 दिनों में उनके घर पहली बार बिजली का कनेक्शन लग गया. चलिए आपको पूरी कहानी बताते हैं.

दरअसल, मामला पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के पुंचा थाना क्षेत्र के लौलदा गांव का है. यहां रहने वाले कृष्णा बाउरी साइकिल मरम्मत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं. उनका कहना है कि पड़ोसियों के साथ जमीन विवाद के कारण पिछले 12 वर्षों से उनके घर बिजली का कनेक्शन नहीं लग पाया था. उन्होंने कई बार बिजली विभाग और प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी.

जनता दरबार में लगाई गुहार
आखिरकार 13 जुलाई को कृष्णा बाउरी की पत्नी कल्पना बाउरी और उनकी बेटी कोलकाता के साल्ट लेक स्थित मुख्यमंत्री के जनता दरबार पहुंचीं. वहां उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई. हालांकि उनकी मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन अधिकारियों ने उनकी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का भरोसा दिया.

प्रशासन ने तुरंत की कार्रवाई
शिकायत दर्ज होने के बाद जनता दरबार के अधिकारियों ने तुरंत पुंचा थाना और स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया. इसके बाद पुलिस, ब्लॉक प्रशासन और बिजली विभाग ने संयुक्त रूप से मामले की जांच शुरू की. दोनों पक्षों को बुलाकर सुनवाई की गई और सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अधिकारियों ने फैसला लिया कि बाउरी परिवार को बिजली कनेक्शन दिया जाना चाहिए.

12 दिन में घर पहुंची बिजली
शुक्रवार को बिजली विभाग के कर्मचारी पुलिस की मौजूदगी में कृष्णा बाउरी के घर पहुंचे और बिजली कनेक्शन लगा दिया. करीब 12 साल बाद जब उनके घर में पहली बार बल्ब जला तो पूरा परिवार भावुक हो गया. लंबे इंतजार के बाद मिली इस सुविधा ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगा दी.

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा था असर
कृष्णा बाउरी ने बताया कि बिजली न होने का सबसे ज्यादा असर उनके बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा. उनकी बेटी आज नर्स के रूप में काम कर रही है, लेकिन बेटे की पढ़ाई बीच में ही रुक गई. उन्होंने कहा कि माध्यमिक परीक्षा के बाद बेटा आगे पढ़ाई नहीं कर सका क्योंकि घर में बिजली की सुविधा नहीं थी.

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