राजस्थान में बदली सदियों पुरानी परंपरा, 13 साल की बेटी बनी पूर्व राजघराने की उत्तराधिकारी, इतिहास रचकर सबको चौंकाया

पहली बार एक 13 वर्षीय लड़की को पूर्व राजघराने का उत्तराधिकारी घोषित किया गया है. खेरवा गांव में आयोजित पारंपरिक 'पाग का दस्तूर' समारोह में तेजस्वी कुमारी जोधा को औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी बनाया गया.

female heir Rajasthan royal family
gnttv.com
  • पाली,
  • 27 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST

राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वर्षों पुरानी परंपरा को नई दिशा दी है. यहां पहली बार एक 13 वर्षीय लड़की को पूर्व राजघराने का उत्तराधिकारी घोषित किया गया है. खेरवा गांव में आयोजित पारंपरिक 'पाग का दस्तूर' समारोह में तेजस्वी कुमारी जोधा को औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी बनाया गया. यह फैसला न केवल परंपरा का सम्मान करता है, बल्कि समाज में बेटियों को बराबरी का अधिकार देने की सोच को भी मजबूत करता है.

65 साल बाद हुई परंपरा, पहली बार बेटी बनी उत्तराधिकारी
पाली जिले के खेरवा गांव स्थित ऐतिहासिक खेरवा किले में गुरुवार को पारंपरिक 'पाग का दस्तूर' समारोह आयोजित किया गया. इस दौरान 13 वर्षीय तेजस्वी कुमारी जोधा को पूर्व राजघराने की उत्तराधिकारी घोषित किया गया. यह समारोह उनके पिता हरीश चंद्र जोधा के निधन के बाद आयोजित किया गया. बताया जाता है कि पिछले करीब 65 वर्षों से इस परिवार में यह रस्म नहीं हुई थी, क्योंकि कोई पुरुष उत्तराधिकारी नहीं था.

वैदिक मंत्रों के बीच पहनाई गई गुलाबी पगड़ी
समारोह में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच तेजस्वी ने सभी धार्मिक रस्में निभाईं. उनके सिर पर गुलाबी रंग की पारंपरिक पगड़ी बांधी गई, जो शोक की समाप्ति और नई जिम्मेदारी संभालने का प्रतीक मानी जाती है. परंपरा के अनुसार यह पगड़ी जोधपुर-मारवाड़ के पूर्व राजघराने की ओर से भेजी गई थी. इसके साथ ही तेजस्वी के माथे पर तिलक भी लगाया गया.

सिर्फ पुरुषों तक सीमित थी यह परंपरा
'पाग का दस्तूर' राजस्थान के उन इलाकों में निभाई जाने वाली परंपरा है, जो कभी जोधपुर रियासत का हिस्सा रहे थे. इस रस्म के तहत परिवार के मुखिया के निधन के बाद उत्तराधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. अब तक यह परंपरा केवल पुरुष उत्तराधिकारियों के लिए ही निभाई जाती थी. ऐसे में तेजस्वी का उत्तराधिकारी बनना इस परंपरा में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है.

गांव के लोगों ने लिया सामूहिक फैसला
ग्रामीणों और समाज के बुजुर्गों ने बताया कि हरीश चंद्र जोधा का कोई बेटा नहीं था. ऐसे में सभी ने मिलकर तेजस्वी को उत्तराधिकारी बनाने का फैसला लिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम परंपरा को बनाए रखते हुए समय के साथ समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव और महिलाओं की समान भागीदारी का संदेश देता है.

पढ़ाई के साथ निभाएंगी जिम्मेदारी
तेजस्वी कुमारी फिलहाल कक्षा 7 की छात्रा हैं. उन्होंने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी और साथ ही उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को भी पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पिता के गांव के विकास से जुड़े सपनों को पूरा करने का प्रयास करेंगी.

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