Awake brain surgery: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल के लाइव ब्रेन सर्जरी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. ऑपरेशन के दौरान मरीज गजल गाता दिख रहा है. आधुनिक तकनीक के तहत की गई ये सर्जरी अब चर्चा में आ गई है. इसमें मरीज को बिना बेहोश किए सिर्फ ऑपरेशन करने वाला शरीर के हिस्से का इलाज किया जाता है. गुलाम अली की गजल गुनगुनाते इस शख्स को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इसके ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन चल रहा है. लेकिन ना तो चेहरे पर ऑपरेशन की कोई शिकन न जुबां में कोई लड़खड़ाहट. छत्तीसगढ़ के रायपुर के सुयश अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर से ग्रस्त एक मरीज के सफल लाइव ऑपरेशन का वीडियो सुर्खियों में छाया है. मेडिकल साइंस की भाषा में समझें तो इसे अवेक क्रेनियोटोमी (awake craniotomy) कहा जाता है.
क्या है अवेक क्रेनियोटोमी?
दरअसल जब किसी को ब्रेन के मोटार एरिया में ट्यूमर होता है, यह एरिया स्पीच को प्रभावित करता है. तो सर्जरी से उसका उपचार किया जाता है. सर्जरी के दौरान अगर मरीज बातचीत करता रहता है तो पता चलता रहता है कि ट्यूमर निकालने का असर कहीं स्पीच एरिया पर तो नहीं हो रहा है. लेकिन अगर मरीज बात करना बंद कर देता है तो हम समझ जाते हैं कि कोई दिक्कत हो रही है. ऐसे में सर्जरी को फौरन बंद करके उसकी जांच की जाती है. जांच में सब कुछ सही आने पर सर्जरी को दोबारा से शुरू किया जाता है. इससे सर्जरी सक्सेसफुल होती है.
कैसे होती है अवेक क्रेनियोटोमी?
ऑपरेशन थिएटर में आने के बाद सबसे पहले मरीज को हल्की नींद की दवा दी जाती है. उस दौरान मरीज को पूरी तरह से बेहोश नहीं किया जाता है. इसके बाद सिर की दोनों तरफ की 6-6 नसों में कुल 12 जगहों पर स्कल्प ब्लॉक में इंजेक्शन देते हैं. इससे बाहर की स्किन सुन्न हो जाती है. फिर ब्रेन को खोला जाता है, और ट्यूमर दिखने लगता है. जिसके बाद बेहोशी की दवा बंद कर दी जाती है. तब मरीज होश में आता है. ब्रेन सेंसिटिव नहीं होता है यानी ब्रेन को दर्द नहीं होता है, इसलिए मरीज को होश में रखते हुए सर्जरी की जाती है.
सर्जरी के दौरान बोलता रहता है मरीज
इस सर्जरी के दौरान मरीज को बोलने, हाथ-पैर चलाने के लिए कहा जाता है, ताकि पता चलता रहे कि मरीज के ब्रेन का कोई हिस्सा प्रभावित तो नहीं हो रहा है. इस सर्जरी में गले में ट्यूब नहीं डाली जाती है. मरीज को आईसीयू में भी होश रहता है. उन्होंने कहा कि यह सर्जरी मरीज के लिए काफी फायदेमंद होता है. लेकिन सर्जरी से पहले मरीज को पूरी बात बताते हैं. इसका फायदा और पूरा प्रोसीजर बताया जाता है, ताकि उनके मन में कोई संदेह न हो. जो मरीज सर्जरी के लिए राजी होते हैं, केवल उनमें ही ये प्रोसीजर किया जाता है.