गठिया मरीजों के लिए एक्सरसाइज कितनी असरदार? नई रिसर्च में उठे सवाल

जर्मनी की Bochum University of Applied Sciences से जुड़े शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक्सरसाइज के प्रभाव उतने असरदार नहीं है. इस अध्ययन में 5 सिस्टमैटिक रिव्यू और 28 रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया.

Osteoarthritis Pain
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST

घुटनों या कूल्हों के दर्द से परेशान मरीजों को अक्सर यही सलाह दी जाती है कि रोजाना एक्सरसाइज करें. ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) के इलाज में एक्सरसाइज को लंबे समय से फर्स्ट लाइन ट्रीटमेंट माना जाता रहा है. लेकिन अब शोधकर्ताओं का कहना है कि एक्सरसाइज के फायदे उतने लंबे समय तक नहीं दिखते, जितना अब तक माना जाता रहा है. यह अध्ययन जर्नल RMD Open (Rheumatic and Musculoskeletal Diseases Open) में प्रकाशित हुआ है.

क्या कहती है नई रिसर्च?
जर्मनी की Bochum University of Applied Sciences से जुड़े शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक्सरसाइज के प्रभाव उतने असरदार नहीं है. इस अध्ययन में 5 सिस्टमैटिक रिव्यू और 28 रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इन सभी में मिलाकर 12,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे. विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक्सरसाइज के फायदे बहुत सीमित हो सकते हैं और कई मामलों में अन्य उपचारों के बराबर या उनसे कम प्रभावी पाए गए.

घुटने, कूल्हे और हाथ के गठिया में अलग-अलग असर
स्टडी के अनुसार घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक्सरसाइज से प्लेसीबो या बिना इलाज की तुलना में दर्द में हल्का सुधार देखा गया. बड़े और लंबे समय तक चलने वाले ट्रायल्स में इसका असर और भी कम दिखाई दिया. हाथ के ऑस्टियोआर्थराइटिस में हल्का लाभ दर्ज किया गया.

अन्य उपचारों के बराबर या कम असर
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि एक्सरसाइज के नतीजे कई अन्य उपचारों के समान रहे, जिनमें शामिल हैं,

  • मरीजों को दी जाने वाली शिक्षा

  • मैनुअल थेरेपी

  • दर्द निवारक दवाएं

  • स्टेरॉयड या हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन

  • आर्थ्रोस्कोपी (कीहोल नी सर्जरी)

कुछ खास मरीजों पर हुए अध्ययनों में पाया गया कि लंबे समय में सिर्फ एक्सरसाइज करने से उतना फायदा नहीं मिला, जितना घुटने की हड्डी को ठीक करने वाली सर्जरी (ओस्टियोटॉमी) या जॉइंट रिप्लेसमेंट से मिला. यानी गंभीर मामलों में सर्जरी ज्यादा असरदार हो सकती है.

क्या इलाज का तरीका बदलेगा?
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब यह जरूरी है कि गठिया के इलाज में एक्सरसाइज की भूमिका पर दोबारा सोच-विचार किया जाए. इसका मतलब यह नहीं है कि एक्सरसाइज बेकार है, बल्कि यह कि हर मरीज के लिए सिर्फ यही एक इलाज पर्याप्त नहीं हो सकता.

क्या एक्सरसाइज बंद कर दें?

  • मांसपेशियां मजबूत होती हैं.

  • वजन कंट्रोल में रहता है.

  • शरीर की कुल फिटनेस बेहतर होती है.

  • इसलिए बिना डॉक्टर से पूछे व्यायाम बंद नहीं करना चाहिए.

 

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