बुखार होना एक आम परेशानी है. मौसम बदलने, वायरल संक्रमण या शरीर में किसी तरह की परेशानी होने पर तापमान बढ़ सकता है. कई बार हल्का बुखार आराम करने से ठीक हो जाता है, लेकिन हर बार इसे मामूली समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. कुछ स्थितियों में तेज बुखार गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि शरीर का तापमान कितना होने पर सावधान हो जाना चाहिए और किन लक्षणों को देखकर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.
कितने डिग्री तापमान होने पर बुखार माना जाता है?
आमतौर पर शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट यानी 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास माना जाता है. हालांकि, हर व्यक्ति का सामान्य तापमान थोड़ा अलग हो सकता है. आमतौर पर 100.4 डिग्री फारेनहाइट यानी 38 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक तापमान को बुखार माना जाता है. सही तापमान जानने के लिए डिजिटल थर्मामीटर का इस्तेमाल करना बेहतर है. केवल माथे पर हाथ रखकर बुखार का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.
कितने डिग्री बुखार को खतरनाक माना जाता है?
अगर शरीर का तापमान 102 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. 103 डिग्री फारेनहाइट यानी करीब 39.4 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक बुखार होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. अगर तापमान लगातार बढ़ रहा है या बुखार कम नहीं हो रहा है, तो जल्द जांच कराएं.
वहीं, 105 डिग्री फारेनहाइट यानी करीब 40.6 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक तापमान होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए. ध्यान रखें कि सिर्फ तापमान से बीमारी की गंभीरता का पता नहीं चलता. बुखार के साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षण भी बहुत जरूरी हैं.
बुखार के साथ ये लक्षण दिखें तो रहें सावधान
अगर बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बहुत तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, बार-बार उल्टी, बेहोशी या दौरे पड़ने जैसी परेशानी हो, तो तुरंत अस्पताल जाएं. शरीर में पानी की कमी होने पर भी स्थिति गंभीर हो सकती है. बहुत कम पेशाब आना, अत्यधिक कमजोरी और पानी न पी पाना इसके संकेत हो सकते हैं.
छोटे बच्चों में बुखार को न करें नजरअंदाज
तीन महीने से कम उम्र के बच्चे का तापमान 100.4 डिग्री फारेनहाइट यानी 38 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं. अगर बच्चा बहुत सुस्त है, दूध नहीं पी रहा है या उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो देर न करें.