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उम्र बढ़ने के साथ बालों का सफेद होना आम बात है. लेकिन जब छोटे बच्चों के सिर पर सफेद बाल दिखाई देने लगते हैं, तो माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है. कई बार बच्चों के बालों का रंग बदलने के पीछे खानपान में कमी या परिवार में पहले से सफेद बाल होने की वजह हो सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों के बाल समय से पहले सफेद क्यों होते हैं और इन्हें सफेद होने से कैसे रोका जा सकता है? आइए जानते हैं इसके कारण और बचाव के आसान तरीके.
बच्चों के बाल सफेद होने के क्या कारण हैं?
बालों का रंग मेलेनिन नाम के एक पदार्थ से तय होता है. जब बालों में मेलेनिन कम बनने लगता है, तो बाल सफेद या भूरे दिखाई देने लगते हैं. बच्चों में कम उम्र में बाल सफेद होने के कई कारण हो सकते हैं.
बालों के समय से पहले सफेद होने का संबंध विटामिन B12, आयरन और फोलेट की कमी से भी हो सकता है. हर बच्चे में सफेद बालों का कारण एक जैसा नहीं होता. इसलिए सही वजह जानना जरूरी है.
बच्चों के बाल सफेद होने से कैसे रोकें?
बच्चों के बालों और शरीर के अच्छे विकास के लिए सही खानपान जरूरी है. उनकी डाइट में प्रोटीन, विटामिन और जरूरी खनिज वाली चीजें शामिल करें. दाल, पनीर और अंडा प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. वहीं, पालक, चना और राजमा से आयरन और फोलेट मिल सकता है.
विटामिन B12 शरीर के लिए जरूरी है. इसकी कमी से जुड़ी समस्या होने पर बालों के समय से पहले सफेद होने की आशंका भी हो सकती है. दूध, दही और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन B12 के स्रोत हैं. बच्चों की उम्र और खानपान के अनुसार सही भोजन चुनें.
बच्चों की डाइट में मेवे, बीज और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी शामिल किए जा सकते हैं. इनमें जिंक और कॉपर जैसे जरूरी तत्व मिलते हैं. संतुलित भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करता है.
बच्चों के बालों की देखभाल कैसे करें?
बच्चों के बालों में धीरे-धीरे कंघी करें और बहुत कसकर चोटी या जूड़ा न बांधें. उनके बाल धोने के लिए बच्चों के लिए बने हल्के शैंपू का इस्तेमाल करें. सफेद बालों को छिपाने के लिए केमिकल वाली हेयर डाई का इस्तेमाल न करें. डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा या विटामिन सप्लीमेंट भी न दें.
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
अगर बच्चे के सफेद बाल लगातार बढ़ रहे हैं और साथ में थकान, कमजोरी, भूख कम लगना या वजन और लंबाई ठीक से न बढ़ने जैसी परेशानी है, तो डॉक्टर से सलाह लें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने के लिए जांच कराने की सलाह दे सकते हैं.