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रात में बिस्तर पर जाते ही दिमाग में चलने लगती हैं हजारों बातें? होने लगती है ओवरथिंकिंग... तो इसे रोकने के लिए अपनाएं ये 5 आसान तरीके

अक्सर लोग रात में बिस्तर पर सोने के लिए जाते हैं, लेकिन नींद आने के बजाय दिमाग में कई विचार आने लगते हैं. उसमें की हुई गलती, पास्ट और फ्यूचर के जुड़ी कई बाते होती हैं. ऐसे में हमें नींद नहीं आती और ओवरथिंक करते हैं.

Overthinking
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

दिनभर की भागदौड़ के बाद जब रात में हम सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, तो अक्सर दिमाग में पुरानी बातें, गलतियां और आने वाले कल की चिंता घूमने लगती है. कई बार थकान के बावजूद नींद नहीं आती और एक ही बात बार-बार सोचने से तनाव बढ़ता रहता है. इसे ओवरथिंकिंग कहा जाता है. कुछ आसान आदतों की मदद से रात में दिमाग को शांत किया जा सकता है.

अपनी परेशानियां डायरी में लिखें

अगर रात में लगातार विचार आ रहे हैं, तो उन्हें दिमाग में रखने के बजाय एक कॉपी या डायरी में लिख दें. दिनभर की चिंता, जरूरी काम या परेशान करने वाली बातों को लिखने से मन हल्का महसूस कर सकता है. इससे बार-बार उसी बात को सोचने की आदत कम करने में मदद मिलती है.

4-7-8 ब्रीदिंग ट्राई करें

ओवरथिंकिंग के समय शरीर और दिमाग दोनों तनाव में आ सकते हैं. ऐसे में 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक मदद कर सकती है. इसमें 4 सेकंड तक नाक से सांस लें, 7 सेकंड तक सांस रोकें और फिर 8 सेकंड में धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें. इसे कुछ बार दोहराने से शरीर को आराम देने में मदद मिल सकती है.

सोने से पहले फोन से बनाएं दूरी

रात में सोने से ठीक पहले फोन चलाने और सोशल मीडिया देखने से दिमाग ज्यादा सक्रिय रह सकता है. इसलिए कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और टीवी बंद कर दें. इसकी जगह हल्की किताब पढ़ना या शांत संगीत सुनना बेहतर विकल्प हो सकता है.

20 मिनट वाला नियम अपनाएं

अगर बिस्तर पर जाने के करीब 20 मिनट बाद भी नींद नहीं आती, तो जबरदस्ती सोने की कोशिश न करें. कुछ देर के लिए बिस्तर से उठकर धीमी रोशनी में किताब पढ़ें या शांत संगीत सुनें. जब नींद महसूस होने लगे, तभी वापस बिस्तर पर जाएं.

सोने और जागने का समय तय करें

हर दिन अलग-अलग समय पर सोने और उठने से नींद का रूटीन बिगड़ सकता है. इसलिए कोशिश करें कि रात में लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह भी तय समय पर उठें. नियमित रूटीन बनने से शरीर को सोने के समय की आदत डालने में मदद मिल सकती है.

 

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