इंदौर में दूषित पानी पीने से फैली बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है. अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं. इनमें से 2 की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है. इस बीच भागीरथपुरा निवासी पार्वती कोंडला में गुलियन-बैरी सिंड्रोम (GBS) जैसे लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई है.
दूषित पानी से बिगड़े हालात
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई में गड़बड़ी सामने आई है. शुरुआती जांच में सीवेज और पेयजल लाइन के आपस में मिलने की आशंका जताई जा रही है. इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े. कई मरीजों में तेज बुखार, उल्टी-दस्त, कमजोरी और न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दे रहे हैं.
GBS जैसे लक्षणों से बढ़ी चिंता
भागीरथपुरा की रहने वाली पार्वती कोंडला में हाथ-पैरों में कमजोरी और झनझनाहट जैसे लक्षण सामने आए हैं. डॉक्टरों को शक है कि यह गुलियन-बैरी सिंड्रोम हो सकता है. GBS एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो कई बार संक्रमण के बाद ट्रिगर हो जाती है.
GBS क्या है और कितना खतरनाक?
GBS में शरीर की इम्यून सिस्टम खुद ही नसों पर हमला करने लगती है. अगर समय रहते इलाज न मिले तो मरीज को चलने, बोलने और सांस लेने तक में दिक्कत हो सकती है. गंभीर मामलों में मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है.
इस बीमारी को लेकर GNT ने यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डॉक्टर कुणाल बहारानी से बातचीत की. पढ़िए इसके कुछ अंश.
1. गुलियन-बैरी सिंड्रोम का मुख्य कारण क्या है?
गुलियन-बैरी सिंड्रोम शरीर की इम्यून सिस्टम के असामान्य प्रतिक्रिया के कारण होता है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पेरिफेरल नसों पर हमला कर देती है. यह अक्सर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण जैसे फ्लू, फूड पॉइजनिंग , डेंगू या COVID-19 के बाद होता है. संक्रमण इम्यून सिस्टम को कंफ्यूज कर देता है, जिससे नसों में सूजन होती है.
2. GBS के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
गुलियन-बैरी सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण आम तौर पर पैरों और पैरों के तलवों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी के रूप में दिखाई देते हैं. यह कमजोरी धीरे-धीरे ऊपर की ओर हाथों और चेहरे तक फैल सकती है. मरीज को चलने में कठिनाई, पैरों में भारीपन, असंतुलन या मांसपेशियों में दर्द महसूस हो सकता है. यह लक्षण कई दिनों से लेकर हफ्तों में धीरे-धीरे बढ़ते हैं.
3. GBS के लिए कौन से टेस्ट जरूरी हैं?
GBS की पुष्टि क्लिनिकल जांच और विभिन्न टेस्टों के संयोजन से की जाती है. नसों की कार्यक्षमता का परीक्षण (nerve conduction study) और इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) नसों में नुकसान का पता लगाते हैं. लंबर पंक्चर से सीएसएफ में प्रोटीन स्तर बढ़ा हुआ दिख सकता है. अन्य बीमारियों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट और MRI भी किया जा सकता है.
4. क्या GBS फिर से हो सकता है?
ज्यादातर मामलों में गुलियन-बैरी सिंड्रोम जीवन में केवल एक बार होता है. हालांकि, कुछ मामलों में रोग पहले कुछ सालों में दोबारा लौट सकता है. नियमित फॉलो-अप और लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराने से समय पर उपचार और बेहतर रिकवरी संभव है.
5. GBS का इलाज कैसे होता है?
गुलियन-बैरी सिंड्रोम का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती उपचार से रिकवरी बेहतर होती है. इलाज में इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन (IVIG) और प्लास्माफेरेसिस शामिल हैं, जो नसों पर इम्यून अटैक को कम करते हैं. इसके अलावा देखभाल, फिजियोथेरेपी भी दी जाती है.
लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को हाथ-पैरों में कमजोरी, झनझनाहट, चलने में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो तो तुरंत अस्पताल जाएं. शुरुआती इलाज से GBS जैसी गंभीर बीमारी में भी मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है.