अक्सर कुछ लोगों को आदत होती है कि वह छोटी-छोटी बातों पर शिकायत करते रहते हैं. जैसे ऑफिस में काम ज्यादा हो, घर में कोई परेशानी हो या किसी से अनबन चल रही हो. ऐसे में वह हर बात को नेगेटिव बात समझते हैं. साथ ही सोचते हैं कि शिकायते करना कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन अगर आपको छोटी-छोटी बात पर शिकायत करने की आदत है को इसका असर आपकी मेंटल हेल्थ पर काफी गहरा पड़ सकता है.
बार-बार नेगेटिव बातें करने से दिमाग उसी तरह के थॉट्स पर ज्यादा ध्यान देने लगता है. जब हम लगातार किसी परेशानी के बारे में सोचते या शिकायत करते हैं, तो दिमाग में उसी तरह के थॉट पैदा करने की आदत मजबूत हो सकती है. इससे आगे भी छोटी परेशानी में नेगेटिव बातें देखने के चांस बढ़ जाते हैं. यानी जितना ज्यादा हम शिकायत करते हैं, उतना ही दिमाग नेगेटिव चीजों पर ध्यान देने का आदी हो सकता है. इससे पॉजिटिव चीजों को देखना और उन पर ध्यान देना मुश्किल लग सकता है.
लगातार शिकायत करने से हमारा स्ट्रेस लेवल भी बढ़ सकता है. लंबे समय तक स्ट्रेस रहने पर शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का लेवल बढ़ सकता है. इसका असर याददाश्त, सोचने और सही फैसला लेने की शक्ति पर पड़ सकता है. साथ ही लंबे समय तक रहने वाला टेंशन हिप्पोकैम्पस नाम के दिमाग के हिस्से पर असर कर सकता है. यह हिस्सा सीखने और याददाश्त से जुड़ा होता है.
हर समय नेगेटिव तरीके से सोचने से मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है. लगातार शिकायत और नेगेटिव सोच चिंता और उदासी जैसी परेशानियों को बढ़ा सकती है. इसलिए परेशानी पर ध्यान देने के साथ उसका सॉल्यूशन खोजने की कोशिश करना ज्यादा जरूरी है.
अगर आपको लगता है कि आप बहुत ज्यादा शिकायत करते हैं, तो अपनी बात लिखने की आदत डाल सकते हैं. डायरी में अपनी परेशानी लिखें और उसके साथ यह भी लिखें कि आप उसे बेहतर करने के लिए क्या कर सकते हैं. इसके अलावा रोज कुछ अच्छी चीजों के बारे में सोचें. छोटी अचीवमेंट्स के लिए खुद को थैंक्स करें और उन लोगों या चीजों पर ध्यान दें जो आपके जीवन में अच्छी हैं.