Different Type Of Roti: केवल गेंहू ही नहीं.. बाजरा, ज्वार, रागी की भी बनाएं रोटी.. सेहत को मिलेगा फायदो का भंडार

हमारे देश के अधिकांश घरों में गेंहू की रोटी बनती है. लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल गेंहू के ही आटे की रोटी बन सकती है. आप ज्वार, रागी और अन्य आटे की भी रोटी बना सकते हैं.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST

भारत के ज़्यादातर घरों में रोटी डेली फूड आइटम है. यह इतनी आम है कि हम अक्सर उसकी न्यूट्रिशन वैल्यू पर ध्यान ही नहीं देते. सालों से हमने गेहूं की रोटी को सबसे पक्का विकल्प बन चुका है, लेकिन हर किसी के लिए वही हर दिन, हर वक्त सही हो ऐसा ज़रूरी नहीं. आजकल डाइजेशन की दिक्कत, ब्लड शुगर बढ़ना, वजन बढ़ना, और कई न्यूट्रिशन वैल्यू की कमी के कारण से लोग अब सोचने लगे हैं कि रोटी के लिए सिर्फ गेहूं ही क्यों?

आयुर्वेद में बताया जाता है कि अगर आप रोज़ाना एक ही आटा खाने की बजाय अलग-अलग आटे को रोटेशन में लाते हैं, तो इसका असर सीधे सेहत, एनर्जी और पाचन पर दिखता है. बाजरा, ज्वार, रागी, चना, ओट्स और दूसरे साबुत अनाज. हर रोटी अपने साथ अलग फायदे लाती है. और आयुर्वेद के नुस्खे तो सबसे बेस्ट होते हैं.

सबसे आम, लेकिन संतुलन जरूरी
गेहूं की रोटी फाइबर और बी-विटामिन्स देती है, जो पाचन और एनर्जी के लिए अच्छी मानी जाती है. लेकिन गेहूं का ज्यादा सेवन कुछ लोगों में वजन बढ़ाने और ब्लड शुगर बढ़ाने की वजह बन सकता है. ऐसे में बेस्ट है कि गेहूं को किसी और आटे के साथ मिला कर खाया जाए.

सर्दियों की ताकत और शुगर-फ्रेंडली ऑप्शन
बाजरा आयरन, मैग्नीशियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है. यह शरीर को गर्म रखता है और रक्त बनने में मदद करता है. बाजरा जैसी मिलेट रोटियां शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में सहायक होती हैं और ताकत भी बढ़ाती हैं. इसके खास फायदे होते हैं कि यह डायबिटीज फ्रेंडली, कमजोरी और ठंड में सहायक और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण से भरपूर होती है.

हल्की, ग्लूटेन-फ्री और वेट मैनेजमेंट में मददगार
ज्वार में फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और बी-विटामिन्स पाए जाते हैं. रिसर्च कहते हैं कि यह लो-कैलोरी विकल्प माना जाता है, इसलिए वजन नियंत्रण के लिए अच्छा है. ये मिलेट उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर हैं जिन्हें ग्लूटेन सेंसिटिविटी है, साथ ही जो हार्ट हेल्थ और पाचन बेहतर करना चाहते हैं.

हड्डियों की मजबूती और लंबे समय तक पेट भरा
रागी को कैल्शियम का पावरहाउस माना जाता है. इसका फाइबर आपको देर तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग कम होती है. रागी हीमोग्लोबिन और ताकत बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है.

एनर्जी देती है, पर थोड़ी भारी हो सकती है
मक्की की रोटी में विटामिन A पाया जाता है और यह जल्दी ऊर्जा देने वाली होती है. यही वजह है कि इसे सर्दियों में पसंद किया जाता है. लेकिन कुछ लोगों को यह भारी लग सकती है. साथ ही बार-बार खाने पर पाचन पर असर डाल सकती है. इसलिए बेहतर है कि खाया जाए हर बैलेंस के साथ.

हल्की, आसान और पेट के लिए आरामदायक
चावल की रोटी ग्लूटेन-फ्री, हल्की और डाइजेशन के लिए आसान मानी जाती है. यह पेट को हल्का रखने में मदद करती है और संवेदनशील पाचन वाले लोगों के लिए ठीक रहती है. यह उन लोगों के लिए भी बेहतर है जिनका पेट जल्दी खराब होता है और जो हल्का भोजन पसंद करते हैं.

प्रोटीन से भरपूर, शुगर कंट्रोल में मदद
बेसन की रोटी में प्रोटीन और फाइबर दोनों होते हैं. यह लंबे समय तक भूख कम करती है और अनावश्यक स्नैकिंग से बचाती है. इसके सेहत को लेकर कई फायदे है, जैसे मसल सपोर्ट, ब्लड शुगर बैलेंस में मदद और वेट मैनेजमेंट के लिए अच्छा होना.

लोग रोटी तो रोज़ खाते हैं, लेकिन अगर आते को लेकर समझदारी बदल जाए, तो आपकी एनर्जी, पाचन और फिटनेस में बड़ा फर्क आ सकता है. इसलिए आज से ही गेहूं के साथ दूसरे आटे को भी जगह दें और अपने खाने को ज़्यादा संतुलित बनाएं.

 

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