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50 की उम्र के बाद शरीर में मांसपेशियां और हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं. यही कारण है कि इस उम्र में घुटनों का दर्द, कमर दर्द, कमजोर हड्डियां, ऑस्टियोपोरोसिस, गिरने का डर और फ्रैक्चर जैसी समस्याएं अक्सर एक साथ दिखाई देती हैं. असल में, मजबूत मांसपेशियां ही कमजोर हड्डियों की सबसे बड़ी सुरक्षा होती हैं. वे जोड़ों पर दबाव कम करती हैं, संतुलन बेहतर बनाती हैं और गिरने की स्थिति में फ्रैक्चर के खतरे को घटाती हैं.
इस उम्र में भारी वर्कआउट नहीं, बल्कि सही और सुरक्षित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग होना चाहिए, जिससे शरीर स्थिर, एक्टिव और आत्मविश्वास से भरा रहे. ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, ये 5 एक्सरसाइज़ 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों की ताकत और संतुलन को बेहतर बनाने में सीधे मदद करती हैंृ.
सिट-टू-स्टैंड
इसके लिए कुर्सी पर बैठें और बिना हाथों का सहारा लिए धीरे-धीरे खड़े हों, फिर वापस बैठ जाएं. यह एक्सरसाइज़ जांघों, हिप्स और कोर मसल्स को मजबूत करती है, जिससे घुटनों और कमर को सहारा मिलता है और रोज़मर्रा की गतिविधियां सुरक्षित बनती हैं.
वॉल पुश-अप्स
इसके लिए दीवार के सामने खड़े होकर दीवार पर पुश-अप करें. यह कंधों, बाजुओं और छाती की ताकत बढ़ाता है, जिससे गिरने से बचाव होता है और शरीर की पोस्चर सुधरती है. वह भी बिना जोड़ों पर ज्यादा दबाव डाले.
हील रेज़
कुर्सी का सहारा लेकर धीरे-धीरे एड़ियों को ऊपर उठाएं और फिर नीचे रखें. यह पिंडलियों और टखनों को मजबूत करता है, जो संतुलन बनाए रखने और फिसलने से बचने में बेहद अहम हैं.
स्टेप-अप्स
सीढ़ी या किसी नीची स्टेप पर एक-एक पैर रखकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे जाएं. इससे पैरों की ताकत, हिप्स की स्थिरता और कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है, जो चलने और सीढ़ियां चढ़ने में मदद करता है.
सिंगल लेग बैलेंस
एक पैर पर खड़े हों और जरूरत हो तो दीवार या कुर्सी का सहारा लें. यह एक्सरसाइज़ हिप्स, कोर और बैलेंस को ट्रेन करती है, जिससे गिरने का खतरा काफी कम हो जाता है.
सही खानपान भी है ज़रूरी
इन एक्सरसाइज़ के साथ संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है. दूध, दही, दाल, मेवे, हरी सब्जियां और फल जैसे प्राकृतिक पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देते हैं. अधिकतर मामलों में प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती, जब भोजन संतुलित हो.