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Side Effect Of Earphone: कैसे ईयरफोन की लत है कानों के लिए खराब, क्या कहता है WHO का नियम

रोजमर्रा की ज़िंदगी में लोग ईय़रफोन का काफी इस्तेमाल करते हैं. अगर साउंड 85 डेसिबल से ज्यादा होती है, तो सुनने में मदद करने वाले तंत्र पर असर पड़ता है. एक बार इस तंत्र पर असर पड़ जाने को रिवर्स नहीं किया जा सकता, जिसके कारण लोगों की सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है.

Earphone Side Effects Earphone Side Effects

आज के समय में ईयरफोन केवल एनजॉयमेंट के लिए नहीं रहे. म्यूजिक सुनना हो, कॉल पर बात करनी हो, पॉडकास्ट या ऑनलाइन मीटिंग, हर जगह ईयरफोन हिस्सा बन चुके हैं. खासकर युवा वर्ग के लिए ये जेब से बैग और फिर सीधे कानों तक पहुंच जाते हैं. लेकिन इस सुविधा के पीछे एक गंभीर जोखिम छिपा है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता. और यह है कि शोर से हमारे सुनने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है.

WHO के अनुसार, दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा युवा असुरक्षित तरीके से ईयरफोन और पर्सनल ऑडियो डिवाइस इस्तेमाल करने के कारण सुनने की समस्या के खतरे में हैं. भारत में भी डॉक्टरों के पास युवाओं में ऐसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं.

समस्या सिर्फ साफ-सफाई नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि हम अक्सर ईयरबड्स की सफाई को लेकर तो चिंतित रहते हैं, लेकिन असली खतरा तेज आवाज़ और लंबे समय तक इस्तेमाल से होता है. लगातार तेज़ आवाज़ में सुनने से कान के अंदर मौजूद नाजुक हेयर सेल्स पर दबाव पड़ता है.

शोर से होने वाली सुनने की समस्या तब शुरू होती है जब कान 85 डेसिबल से ज्यादा आवाज़ के संपर्क में लंबे समय तक रहता है. ये हेयर सेल्स एक बार खराब हो जाएं तो दोबारा ठीक नहीं होतें. शुरुआत में समस्या अस्थायी लग सकती है, लेकिन समय के साथ यह स्थायी रूप ले सकती है.

बचाव है संभव
अच्छी खबर यह है कि इस परेशानी से बचाव पूरी तरह संभव है. इसके लिए तेज शोर से बचें, ज़रूरत पड़ने पर ईयरप्लग या ईयरमफ्स का इस्तेमाल करें, नॉइस कैंसेलेशन ईयरफोन अपनाएं, ताकि आवाज़ बढ़ाने की जरूरत न पड़े.

अपनाएं 60–60 नियम
डॉक्टर और विशेषज्ञ WHO के 60–60 नियम की सलाह अपनाने की बात करते हैं. यह नियम कहता है कि 60 प्रतिशत से ज्यादा वॉल्यूम न रखें, लगातार 60 मिनट से ज्यादा न सुनें. इसके अलावा, रोज़ाना ईयरफोन के इस्तेमाल को सीमित रखें और कोशिश करें कि आवाज़ का स्तर 80 dB से कम रहे.

ईयरफोन हमारी जिंदगी को आसान बनाते हैं, लेकिन अगर सही तरीके से इस्तेमाल न किए जाएं, तो यही आदत भविष्य में सुनने की बड़ी समस्या बन सकती है. आज थोड़ी सी सावधानी अपनाकर हम अपनी सुनने की क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं.