ब्रिटेन की 52 वर्षीय महिला की मामूली खरोंच कुछ ही घंटों में सेप्सिस में बदल गई. हालत इतनी खराब हो गई कि डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए हाथ-पैर काटने पड़े. महिला 32 हफ्तों तक अस्पताल में भर्ती रहीं, इस दौरान उन्हें कई बार कार्डियक अरेस्ट भी हुआ.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला पहले बिल्कुल सामान्य थीं. एक दिन काम से लौटने के बाद उनकी तबीयत खराब लगी. अगले दिन वे बेहोश हो गईं, हाथ-पैर ठंडे पड़ गए, होंठ नीले हो गए और सांस लेने में दिक्कत होने लगी. उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच में गंभीर संक्रमण का पता चला.
कैसे हुआ संक्रमण?
डॉक्टरों का मानना है कि महिला की स्किन पर एक छोटी सी खरोंच थी, जिसे उनके पालतू कुत्ते ने चाट लिया. कुत्तों की लार में पाए जाने वाले Capnocytophaga canimorsus नामक बैक्टीरिया आमतौर पर जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इंसानों में खून के जरिए शरीर में फैलकर गंभीर संक्रमण कर सकते हैं.
जब बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं तो शरीर की इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया बेकाबू हो जाती है और यही स्थिति सेप्सिस कहलाती है.
क्या है सेप्सिस?
सेप्सिस एक जानलेवा स्थिति है. यह तब होता है जब शरीर किसी संक्रमण के खिलाफ इतनी तीव्र प्रतिक्रिया देता है कि वह अपने ही अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगता है. गंभीर मामलों में यह सेप्टिक शॉक में बदल सकता है, जिसमें ब्लड प्रेशर बहुत नीचे गिर जाता है. इससे अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है और मल्टी-ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है.
सेप्सिस की वजह
बैक्टीरियल इंफेक्शन इसका सबसे आम कारण है. इसके अलावा फंगल, वायरल या परजीवी संक्रमण भी जिम्मेदार हो सकते हैं. आमतौर पर ये संक्रमण फेफड़ों या श्वसन तंत्र, यूरिनरी ट्रैक्ट, पेट या आंत या त्वचा से शुरू होते हैं.
सेप्सिस के लक्षण क्या हैं?
तेज बुखार या शरीर का तापमान बहुत कम होना
दिल की धड़कन तेज होना
सांस लेने में तकलीफ
अत्यधिक कमजोरी
पेशाब कम आना
त्वचा पर लाल या गहरे धब्बे
ठंड लगना या कंपकंपी
लो ब्लड प्रेशर
सेप्सिस से क्या-क्या हो सकता है?
सेप्टिक शॉक-ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है.
एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS)- फेफड़ों में पानी भरने से सांस लेने में गंभीर दिक्कत.
डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएगुलेशन (DIC)-खून के थक्के बनने और अत्यधिक ब्लीडिंग की समस्या.
किडनी फेलियर-कई बार डायलिसिस की जरूरत पड़ती है.
पोस्ट-सेप्सिस सिंड्रोम-लंबे समय तक थकान, याददाश्त की समस्या और मानसिक तनाव.
क्या रखें सावधानी?
किसी भी कट या खरोंच को तुरंत साफ करें.
पालतू जानवरों को घाव चाटने न दें.
इम्यूनिटी कमजोर हो तो विशेष सतर्क रहें.
संक्रमण के लक्षण दिखें तो देरी न करें.