World Protein Day: प्रोटीन शरीर का सबसे जरूरी पोषक तत्व, रोज कितने ग्राम प्रोटीन लेना है जरूरी, वेजिटेरियन हैं तो ऐसे पूरी करें जरूरत

World Protein Day 2026: हर साल 27 फरवरी को वर्ल्ड प्रोटीन डे मनाया जाता है. दरअसल शरीर में हुए डैमेज को रिपेयर करने का काम प्रोटीन ही करता है.

World Protein Day
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST
  • 27 फरवरी को मनाया जाता है वर्ल्ड प्रोटीन डे
  • 70% से ज्यादा भारतीयों की डाइट में प्रोटीन की कमी
  • ज्यादा या कम प्रोटीन लेने के फायदे और नुकसान

27 फरवरी को हर साल World Protein Day मनाया जाता है. इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि प्रोटीन शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व है. लेकिन भारत की बड़ी आबादी रोजाना अपनी जरूरत के मुताबिक प्रोटीन नहीं ले पा रही है.

एक सर्वे के मुताबिक देश में करीब 70% से ज्यादा लोगों की डाइट में प्रोटीन की कमी  है. हमारी थाली में रोटी, चावल और आलू जैसी चीजें ज्यादा हैं, जबकि दाल, दूध, पनीर, अंडे या अन्य प्रोटीन सोर्स वाले फूड कम शामिल होते हैं.

वर्ल्ड प्रोटीन डे के मौके पर आइए जानते हैं प्रोटीन की जरूरत हर किसी को क्यों है? प्रोटीन कैसे काम करता है, रोजाना कितना प्रोटीन लेना चाहिए और डाइट में इसकी मात्रा अधिक या कम होने पर क्या फायदे-नुकसान हो सकते हैं.

रोजाना कितना प्रोटीन लेना चाहिए?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी Indian Council of Medical Research (ICMR) के अनुसार एक पुरुष को रोज लगभग 54 ग्राम और महिला को करीब 45 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 60 ग्राम से ज्यादा प्रोटीन रोजाना लेना चाहिए.

वहीं World Health Organization (WHO) के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को प्रति किलोग्राम वजन पर लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन रोज लेना चाहिए. यानी अगर किसी का वजन 60 किलो है तो उसे रोज करीब 48 ग्राम प्रोटीन लेना जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति ज्यादा शारीरिक मेहनत करता है, जिम जाता है या खिलाड़ी है, तो उसकी जरूरत और बढ़ सकती है.

 

प्रोटीन कैसे काम करता है?
प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं का निर्माण और मरम्मत करता है. यह मांसपेशियां मजबूत बनाता है, एंजाइम और हार्मोन तैयार करने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है.

प्रोटीन की कमी से क्या होता है?
डॉक्टरों के मुताबिक शरीर की मांसपेशियों, त्वचा, बाल, नाखून, हार्मोन और एंजाइम बनाने में प्रोटीन की अहम भूमिका होती है. अगर शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता तो जल्दी थकान होना, अनिद्रा मांसपेशियों में कमजोरी, बालों का झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना, ग्रोथ रुकना जैसी दिक्कतें आने लगती हैं.

प्रोटीन की लंबे समय तक कमी रहने पर इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और शरीर में हुए डैमेज को रिपेयर घट जाती है.

लोग क्यों नहीं ले पा रहे पर्याप्त प्रोटीन?
बहुत से लोग समझते हैं कि पेट भर खाना ही पर्याप्त है, जबकि शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनरल का संतुलन चाहिए. कई लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं या सिर्फ चाय-बिस्किट पर दिन की शुरुआत करते हैं. दोपहर और रात के खाने में भी दाल या प्रोटीन स्रोत की मात्रा कम रहती है.

प्रोटीन की कमी कैसे पूरी करें?
1. दालें और फलियां
मूंग, मसूर, अरहर, चना दाल, राजमा और छोले प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं.

2. दूध और दूध से बने उत्पाद
दूध, दही, पनीर और छाछ से भी अच्छी मात्रा में प्रोटीन मिलता है.

3. अंडा, चिकन और मछली
जो लोग मांसाहार लेते हैं, उनके लिए ये उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन स्रोत हैं.

4. नट्स और बीज
मूंगफली, बादाम, अखरोट, अलसी और चिया बीज स्नैक के रूप में लिए जा सकते हैं.

 

शाकाहारी लोग कैसे पूरी करें जरूरत?
भारत में बड़ी आबादी शाकाहारी है. ऐसे में यह सवाल आम है कि बिना अंडा या मांस खाए प्रोटीन कैसे पूरा करें. 

  • दाल और चावल का साथ में सेवन

  • राजमा-चावल या खिचड़ी

  • सोया, टोफू और सोया चंक्स

  • पनीर और दही को रोज डाइट में शामिल करना

  • अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स)

डाइट में प्रोटीन की मात्रा अधिक या कम होने पर क्या हो सकता है?
अगर शरीर को जरूरत से कम प्रोटीन मिलता है तो मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जल्दी थकान महसूस होती है, बाल झड़ने लगते हैं और इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है. बच्चों में इसकी कमी से शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है, वहीं घाव भरने में भी ज्यादा समय लगता है.

दूसरी तरफ जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, पाचन संबंधी दिक्कतें और डिहाइड्रेशन हो सकता है. लंबे समय तक बहुत हाई-प्रोटीन डाइट लेने से शरीर में अन्य पोषक तत्वों का संतुलन भी बिगड़ सकता है. इसलिए उम्र, वजन और शारीरिक गतिविधि के अनुसार संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना ही सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है.

 

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