दुनियाभर में वजन कम करने वाले इंजेक्शन जैसे Ozempic और Mounjaro तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन एक नई स्टडी ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक दिल की सुरक्षा किससे बेहतर मिलती है-दवा या सर्जरी? जर्नल Obesity Surgery में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, मेटाबोलिक और बैरिएट्रिक सर्जरी लंबे समय में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर हृदय जोखिमों को कम करने में अधिक प्रभावी हो सकती है.
स्टडी में क्या सामने आया
यह एक मेटा-एनालिसिस था, जिसमें उन मरीजों के दीर्घकालिक परिणामों की तुलना की गई जो या तो GLP-1 दवाएं (जैसे सेमाग्लूटाइड और टिरजेपेटाइड) ले रहे थे या उन्होंने मेटाबोलिक/बैरिएट्रिक सर्जरी कराई थी. रिजल्ट था कि, सर्जरी कराने वाले मरीजों में मेजर कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स (हार्ट अटैक, स्ट्रोक) का खतरा अधिक कम हुआ, कुल मृत्यु दर कम पाई गई और लंबे समय तक वजन कम रहने की संभावना अधिक रही. हालांकि, GLP-1 दवाओं को भी हृदय जोखिम कम करने में लाभकारी माना गया है, लेकिन उनका असर दवा जारी रहने तक ही अधिक रहता है.
सर्जरी क्यों देती है लंबे समय का फायदा
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों के अनुसार, वजन घटाने वाले इंजेक्शन वजन और शुगर कंट्रोल में मदद करते हैं, लेकिन दवा बंद होने के बाद अक्सर वजन दोबारा बढ़ जाता है, खासकर जब सख्त डाइट और लाइफस्टाइल लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो.
इसका उल्टा बैरिएट्रिक सर्जरी शरीर में एक तरह का स्थायी मेटाबोलिक बदलाव करती है.
जैसे: पेट का आकार छोटा हो जाता है, भूख से जुड़े हार्मोन बदलते हैं और इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर होती है. स्लीव गेस्ट्रोक्टॉमी और गैस्ट्रिक बायपास जैसी सर्जरी के बाद 15–20 साल तक वजन और शुगर नियंत्रण बेहतर रहने के प्रमाण मिले हैं.
दवा और सर्जरी कैसे काम करता है
GLP-1 दवाएं शरीर में भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन की नकल करती हैं. ये प्रभावी होती हैं, लेकिन नियमित और लंबे समय तक लेना जरूरी होता है. वहीं सर्जरी पाचन तंत्र की संरचना बदल देती है, GLP-1, घ्रेलिन और अन्य हार्मोन पर स्थायी असर डालती है, शरीर का “मेटाबोलिक सेट-पॉइंट” बदल देती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization के अनुसार, लंबे समय तक वजन नियंत्रित रहना ही हृदय रोग के जोखिम को कम करता है.
भारत में क्यों है यह और महत्वपूर्ण
भारत में कम उम्र में ही पेट के आसपास मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है. एशियाई लोगों में कम BMI पर भी मेटाबोलिक समस्याएं शुरू हो जाती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों का BMI ज्यादा है और साथ में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्लीप एपनिया और फैटी लिवर जैसी समस्याएं हैं उनके लिए बैरिएट्रिक सर्जरी एक प्रमाणित और प्रभावी विकल्प हो सकती है.
इलाज हमेशा मरीज के अनुसार होना चाहिए
डॉक्टरों का कहना है कि इसे सर्जरी या दवा की लड़ाई नहीं मानना चाहिए. जो लोग सर्जरी नहीं करा सकते या नहीं चाहते, उनके लिए दवाएं अच्छा विकल्प हैं. लेकिन मध्यम से गंभीर मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों में सर्जरी लंबे समय तक बेहतर हृदय सुरक्षा दे सकती है.
नई स्टडी बताती है कि वजन घटाने वाले इंजेक्शन वजन और शुगर नियंत्रण में मददगार हैं, लेकिन बैरिएट्रिक सर्जरी कुछ मरीजों में दिल की बीमारी के जोखिम को लंबे समय तक कम करने में अधिक प्रभावी साबित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही इलाज का चुनाव मरीज की स्थिति, जोखिम और लंबे समय तक परिणाम बनाए रखने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए.
ये भी पढ़ें: