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गजब गुलाल है! गाल पर लगाने के साथ, हलवे में मिलाकर खा भी सकते हैं, गाजर-गुलाब से बनता है ये रंग

यह गुलाल सिर्फ रंगों की खुशी नहीं देगा, बल्कि लोगों को मानसिक शांति भी प्रदान करेगा. इसमें गाजर, चुकंदर, गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसे प्राकृतिक रंग और सुगंध का उपयोग किया गया है. अरोमाथेरेपी में इन सुगंधों को तनाव कम करने और मन को शांत रखने में उपयोगी माना जाता है.

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 Bhagalpur gulal Bhagalpur gulal

होली के त्योहार पर इस बार रंगों के साथ सेहत और खुशबू का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. बिहार के भागलपुर में एक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अरोमाथेरेपी आधारित ऑर्गेनिक गुलाल तैयार किया जा रहा है. इस गुलाल की खासियत यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक है, त्वचा के लिए सुरक्षित है और इसे हलवे जैसे खाद्य पदार्थों में मिलाकर खाया भी जा सकता है.

गाजर, चुकंदर, गुलाब, लैवेंडर से बनेगा कलर
उद्यमिता सह स्वयं सहायता समूह की संचालिका डॉ. प्रिया सोनी के अनुसार, यह गुलाल सिर्फ रंगों की खुशी नहीं देगा, बल्कि लोगों को मानसिक शांति भी प्रदान करेगा. इसमें गाजर, चुकंदर, गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसे प्राकृतिक रंग और सुगंध का उपयोग किया गया है. अरोमाथेरेपी में इन सुगंधों को तनाव कम करने और मन को शांत रखने में उपयोगी माना जाता है.

खुशबू का सीधा असर मस्तिष्क के भावनात्मक हिस्से पर पड़ता है, जिससे मूड बेहतर होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. इस गुलाल को तैयार करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. यह पूरी तरह फूलों, सब्जियों और प्राकृतिक सुगंधित तत्वों से बनाया जा रहा है.

त्वचा के लिए सुरक्षित, बढ़ रही मांग
त्योहारी भागदौड़ के बीच यह सुगंधित गुलाल लोगों को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसे त्वचा के अनुकूल और पूरी तरह रसायन मुक्त बनाया गया है. होली के बाद मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए हर्बल और ऑर्गेनिक गुलाल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी सहारा देने में मददगार माना जा रहा है. इस बार बाजार में हर्बल और अरोमा गुलाल की मांग तेजी से बढ़ रही है. प्राकृतिक रंग रासायनिक रंगों की तुलना में सुरक्षित और बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा हो सके.

रिपोर्टर: राजीव सिद्धार्थ

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