पराली से बनाया बायो फ्यूल, गांव के छात्रों का कमाल! देशभर में छाया पंजाब स्कूल का अनोखा साइंस प्रोजेक्ट

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों की प्रतिभा एक बार फिर देश स्तर पर चमकी है. जी हां, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जबोवाल के दो विद्यार्थियों और एक अध्यापक द्वारा तैयार किया गया वैज्ञानिक प्रोजेक्ट 'विकसित भारत बिल्डाथॉन-2025' में जिला स्तर पर 'सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट' चुना गया है. इस प्रोजेक्ट ने न केवल वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया है, बल्कि प्रदूषण और खेती बाड़ी वेस्ट जैसी बड़ी समस्याओं का समाधान भी पेश किया है.

खेती के कचरे से बनाया बायो फ्यूल
gnttv.com
  • अमृतसर,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:27 PM IST

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों की प्रतिभा एक बार फिर देश स्तर पर चमकी है. जी हां, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जबोवाल के दो विद्यार्थियों और एक अध्यापक द्वारा तैयार किया गया वैज्ञानिक प्रोजेक्ट 'विकसित भारत बिल्डाथॉन-2025' में जिला स्तर पर 'सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट' चुना गया है. इस प्रोजेक्ट ने न केवल वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया है, बल्कि प्रदूषण और खेती बाड़ी वेस्ट जैसी बड़ी समस्याओं का समाधान भी पेश किया है.

इस प्रोजेक्ट को स्कूल के वोकेशनल लेक्चरर (हॉर्टिकल्चर) संजीव कुमार के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों साजन प्रीत सिंह और सुखबीर सिंह ने तैयार किया. प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य खेती बाड़ी और बागवानी वेस्ट को रीसायकल करके बायो फ्यूल तैयार करना और उसकी मदद से स्टीम के जरिए पौष्टिक भोजन बनाना है.

स्टीम कुकिंग को बढ़ावा
संजीव कुमार ने बताया कि, प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में विभाजित किया गया था. पहले हिस्से में खेती बाड़ी वेस्ट, सूखे पत्ते, गार्डन वेस्ट, बेकार कागज और लकड़ी के बुरादे जैसी चीजों का उपयोग करके बायो ब्रिकेट्स तैयार किए गए. दूसरे हिस्से में एक विशेष बायो कुकर तैयार किया गया, जिसमें स्टीम की मदद से खाना बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि स्टीम के जरिए तैयार किया गया भोजन अधिक पौष्टिक होता है, क्योंकि इसमें भोजन की न्यूट्रिशन वैल्यू बरकरार रहती है. सीधे आग पर भोजन बनाने से पोषक तत्व कम हो जाते हैं, जबकि स्टीम कुकिंग इस समस्या को कम करती है.

दो से तीन महीने की कड़ी मेहनत
विद्यार्थी सुखबीर सिंह और साजन प्रीत सिंह ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए उन्हें करीब दो से तीन महीने तक मेहनत करनी पड़ी. उन्होंने पहले वेस्ट पेपर को 24 घंटे पानी में भिगोया और फिर उसमें सूखे पत्ते, कांग्रेस घास और लकड़ी के बुरादे को मिलाकर मिश्रण तैयार किया. इस मिश्रण को मोल्ड में डालकर बायो ब्रिकेट्स बनाई गईं.

खेतीबाड़ी वेस्ट को बायो फ्यूल की तरह इस्तेमाल
विद्यार्थियों ने कहा कि, यह प्रोजेक्ट पंजाब में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का बड़ा समाधान साबित हो सकता है. यदि खेती बाड़ी वेस्ट को इस तरह रीसायकल करके बायो फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

नकद इनाम के लिए चुना गया प्रोजेक्ट
स्कूल प्रबंधन ने इस उपलब्धि को गर्व का पल बताया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस प्रोजेक्ट को नकद इनाम के लिए भी चुना गया है, जिससे विद्यार्थियों का हौसला और बढ़ेगा.'विकसित भारत बिल्डाथॉन' देश स्तर का बड़ा इनोवेशन प्रोग्राम है, जिसमें देशभर के एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों और तीन लाख से ज्यादा स्कूलों ने भाग लिया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भरता, स्थिरता और नई सोच से जोड़ना है, ताकि वे समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोज सकें.

रिपोर्टर: अमित शर्मा

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