मां… ये सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि हर वीर के साहस के पीछे खड़ी वो खामोश ताकत है, जो खुद पीछे रहकर अपने बच्चों को आगे बढ़ाती है. अकसर दुनिया सिर्फ बेटे या बेटी की कामयाबी देखती है, लेकिन उस मुकाम तक पहुंचाने में मां के त्याग, दर्द और तपस्या कहीं न कहीं छिप जाती है. कुछ मांएं ऐसी होती हैं, जिनके बच्चों ने देश के लिए अपनी जान हंसते-हंसते न्यौछावर कर दी, और उन्होंने उस अपार दर्द को भी गर्व में बदल दिया. वहीं इतिहास में ऐसी वीरांगनाएं भी हुईं, जिनकी पहचान उनके बच्चों से नहीं, बल्कि उन माताओं के नाम से आज तक बच्चों को जाना जाता है.
1. भगत सिंह की मां विद्यावती देवी
भगत सिंह का नाम हर भारतीय के दिल में बसता है, लेकिन उनकी ताकत थीं उनकी मां, विद्यावती देवी, जिन्हें 'पंजाब माता' कहा जाता है. देशभक्ति उनके परिवार की रग-रग में थी, लेकिन फिर भी अपने जवान बेटे को हंसते-हंसते फांसी पर जाते देखना आसान नहीं था. उन्होंने अपने पांच बेटों और तीन बेटियों को देशसेवा की सीख दी और उन्हें देश के नाम कर दिया. हर दर्द को मुस्कान के पीछे छुपाकर उन्होंने अपने बेटे की शहादत को गर्व में बदल दिया.
2. चंद्रशेखर आजाद की मां जगरानी देवी
महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की मां जगरानी देवी ने अपने बेटे को बचपन से ही निडर बनना सिखाया. आजाद ने अंग्रेजों के सामने कभी झुकने और उनके हाथ आने से बेहतर खुद को गोली मारना चुना, और इस जज्बे के पीछे उनकी मां की परवरिश थी. जगरानी देवी ने गरीबी और संघर्ष के बीच अपने बेटे में देशभक्ति के बीज बोए. बेटे की शहादत के बाद भी उन्होंने गर्व से सिर ऊंचा रखा.
3. मां और योद्धा रानी लक्ष्मीबाई
रानी लक्ष्मीबाई सिर्फ एक वीर रानी या स्वराज की आवाज ही नहीं थी, बल्कि एक मां भी थीं. जब युद्ध का समय आया, तो उन्होंने अपने बेटे दामोदर राव को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाया. मातृत्व और वीरता का ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है. उन्होंने अपने बच्चे की सुरक्षा के साथ-साथ अपने राज्य और सम्मान की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया. 1857 में उनकी वीरता को देख कर अंग्रेजों ने उन्हें मर्दानी कह कर संबोधित किया था.
4. शिवाजी महाराज की मां, राजमाता जीजाबाई
राजमाता जीजाबाई वो नाम हैं, जिनके बिना मराठा साम्राज्य की कहानी अधूरी है. उन्होंने शिवाजी को बचपन से ही वीरता, धर्म और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया. रामायण और महाभारत की कहानियों से उनके मन में देशभक्ति जगाई. जब शिवाजी ने स्वराज का सपना देखा, तो जीजाबाई उनकी सबसे बड़ी ताकत बनीं. कठिन समय में उन्होंने प्रशासन संभाला और हर मोड़ पर बेटे का मार्गदर्शन किया.
5. नीरजा भनोट की मां रमा भनोट
नीरजा भनोट ने 1986 में हाइजैक हुए विमान में यात्रियों की जान बचाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी. इतनी कम उम्र में उनकी बहादुरी ने पूरे देश को गर्व महसूस कराया. एक संस्था ने नीरजा की याद में नीरजा भनोट पैन एम न्यास की स्थापना की, जो महिलाओं को उनके साहस और वीरता के लिए सम्मानित करती है. बाद में नीरजा को 'अशोक चक्र' से भी सम्मानित किया गया. वह ये अवार्ड पाने वाली सबसे कम उम्र की महीला बनी.
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