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नीतीश के बाद कौन होगा बिहार का CM, इन नामों की हो रही चर्चा

बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर होने जा रहा है. सूबे में मुख्यमंत्री बदलने जा रहा है. सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय हो गया है. उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है. नीतीश कुमार के बाद बिहार के मुख्यमंत्री बनने की रेस में नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी, संजीव चौरसिया का नाम शामिल है.

Samrat Choudhary and Nityanand Rai
रोहित कुमार सिंह
  • पटना,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय हो गया है. करीब 2 दशकों से ज्यादा समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नए राजनीतिक समीकरण बनने की शुरुआत हो गई है.

नीतीश कुमार ने गुरुवार को खुद यह घोषणा कर दी है कि वह अपनी मर्जी से राज्यसभा जाना चाहते हैं और मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिल्ली जाएंगे, तो बिहार में सत्ता की कमान किसके हाथ में होगी. राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है.

कौन बनेगा बिहार का सीएम?
एनडीए के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाता है तो पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाएगी. फिलहाल कई नामों पर मंथन चल रहा है, लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा है.

सम्राट चौधरी की दावेदारी-
वर्तमान में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे मजबूत माना जा रहा है. सम्राट चौधरी ओबीसी वर्ग के कुशवाहा समाज से आते हैं और पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने संगठन और सरकार, दोनों स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है.

पिछले 2 सालों में सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ सरकार में काम करने का अनुभव भी हासिल किया है, जिसके कारण उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है. भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत नेता माना जाता है.

नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में-
मुख्यमंत्री की रेस में दूसरा प्रमुख नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का है. नित्यानंद राय ओबीसी के यादव समाज से आते हैं और पिछले 6 वर्षों से केंद्र में गृहमंत्री अमित शाह के जूनियर मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि अगर भाजपा किसी 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर राजद के सबसे बड़े वोट बैंक यादव समाज को बड़ा संदेश देना चाहे, तो नित्यानंद राय एक रणनीतिक विकल्प हो सकते हैं.

बिहार की राजनीति में यादव वोट बैंक पर परंपरागत रूप से लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव दबदबा 1990 के बाद से ही बना हुआ है. ऐसे में भाजपा अगर यादव समुदाय से मुख्यमंत्री बनाती है, तो यह विपक्ष के इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति भी हो सकती है.

मंत्री दिलीप जायसवाल का भी नाम-
सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के बाद बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल का नाम भी चर्चा में है. दिलीप जायसवाल ईबीसी वैश्य समुदाय से आते हैं और बीजेपी अगर किसी ओबीसी को नहीं चुनकर इबीसी नेता पर दावा लगाना चाहती है दिलीप जायसवाल एक विकल्प हो सकते हैं.

दिलीप जायसवाल वैश्य (कलवार) समाज से आते हैं और सीमांचल के किशनगंज क्षेत्र से उनका मजबूत राजनीतिक आधार है. पार्टी के अंदर उन्हें सौम्य और संतुलित स्वभाव का नेता माना जाता है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल दौरे पर किशनगंज जब भी जाते हैं, तो अक्सर दिलीप जायसवाल के मेडिकल कॉलेज में ही ठहरते हैं. इससे उनकी केंद्रीय नेतृत्व से नजदीकी का अनुमान लगाया जा सकता है.

संजीव चौरसिया-
मुख्यमंत्री बनने की रेस में पटना की दीघा विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक रहे बीजेपी लीडर संजीव चौरसिया का नाम भी सामने आ रहा है.
संजीव चौरसिया वैश्य समाज से आते हैं और उन्हें पटना क्षेत्र में मजबूत संगठनात्मक पकड़ वाला नेता माना जाता है. लंबे समय से विधायक रहने के कारण उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव भी हासिल है. संजीव चौरसिया के पिता गंगा प्रसाद भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और पूर्व में सिक्किम के गवर्नर भी रह चुके हैं.

हालांकि भाजपा के भीतर कई नामों पर चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा. बिहार की जातीय और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा ऐसा चेहरा सामने ला सकती है, जो संगठन, सामाजिक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को साध सके.

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