सबकी पसंदीदा दिल्ली ठंड आते ही प्रदूषण के चादर से ढकी हुई नजर आती है. हर साल राजधानी का AQI सर्दियों के मौसम में 400 के पार और लाल निशान में ही नजर आता है. इसको ही देखते हुए, दिल्ली प्रशासन ने वायु प्रदूषण से निपटने का जुगाड़ करते हुए CAQM ने GRAP का संशोधित प्लान जारी करने का फैसला ले लिया है. या यूं कहें कि GRAP को तत्काल प्रभाव से जारी कर दिया गया है, जिसके तहत जैसे-जैसे वायु प्रदूषण बढ़ेगा वैसे-वैसे इसके चरणों में लागू किया जाएगा.
GRAP का मतलब?
GRAP यानी Graded Response Action Plan. प्रभारियों का मानना है कि, GRAP का उद्देश्य ही है कि अचानक से वायु प्रदूषण को लेकर कोई कार्यवाही करने की जगह चरणबद्ध तरीके से इस योजना को लागू करना ताकि AQI स्तर पर नियंत्रण बनाया जा सके. अगर शुरुआती नियम लागू करने से प्रदूषण स्तर घटेगा तो उसी को लागू रहने दिया जाएगा. लेकिन अगर लेवल बढ़ता है तो GRAP को और सख्ती से लागू किया जाएगा. GRAP के तहत 4 चरणों में चार सख्त रूल बनाए गए हैं, जो AQI लेवल घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. जैसे ही AQI 450 के पार पहुंचेगा सभी नियमों को और सख्ती से लागू कर दिया जाएगा.
स्टेज-1: AQI 201 से 300
जब दिल्ली का AQI 201 से 300 के बीच पहुंचता है तो इसे 'पुअर' कैटेगरी माना जाता है और GRAP का पहला चरण लागू होता है. इस स्टेज में कुल 25 एक्शन पॉइंट्स हैं. इसमें धूल और कूड़ा जलाने पर रोक लगाने, सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाने, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी और लोगों को प्रदूषण से बचने के लिए जागरूक करने जैसे कदम शामिल हैं. यानी शुरुआत में उन गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, जिनसे हवा और ज्यादा खराब हो सकती है.
स्टेज-2: AQI 301 से 400
AQI 301 से 400 के बीच पहुंचने पर हवा 'वेरी पुअर' कैटेगरी में आ जाती है और GRAP का दूसरा चरण लागू होता है. इस स्टेज में 8 एक्शन पॉइंट्स हैं. इस दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने, पार्किंग फीस बढ़ाकर निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर ज्यादा सख्ती की जाती है. यानी पहले चरण के नियम जारी रहते हैं और उनके ऊपर कुछ अतिरिक्त पाबंदियां जुड़ जाती हैं.
स्टेज-3: AQI 401 से 450
जब AQI 401 से 450 के बीच पहुंचता है तो इसे 'सीवियर' कैटेगरी माना जाता है. इस स्तर पर GRAP का तीसरा चरण लागू होता है, जिसमें 10 एक्शन पॉइंट्स हैं. इस स्टेज में निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर ज्यादा सख्ती की जाती है. साथ ही दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड मोड में पढ़ाई का प्रावधान है. यानी जहां ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध होगी, और जरूरत पड़ने पर ही स्कूल आना होगा.
स्टेज-4: AQI 450 के पार
AQI 450 से ऊपर जाते ही GRAP का सबसे सख्त यानी चौथा चरण लागू होता है. इसे 'सीवियर प्लस' कैटेगरी माना जाता है. इस स्टेज में 5 एक्शन पॉइंट्स हैं. इस दौरान दिल्ली में ट्रकों की एंट्री पर और सख्ती की जाती है. कुछ जरूरी सेवाओं और तय क्लीनर-फ्यूल या BS-VI वाहनों को नियमों के तहत छूट दी जा सकती है. इसके अलावा निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कामों पर भी ज्यादा सख्त रोक लगाई जाती है. कक्षा 6 से 9 और कक्षा 11 के लिए भी हाइब्रिड पढ़ाई का प्रावधान इस स्तर पर बढ़ाया जा सकता है.
पार्किंग फीस से लेकर वर्क फ्रॉम होम तक
नए GRAP में प्रदूषण बढ़ने पर निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाने का प्रावधान भी है. वहीं, जरूरत पड़ने पर सरकारी, नगर निगम और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है. यानी GRAP का सीधा फॉर्मूला यही है कि AQI जितना बढ़ेगा, नियम उतने ही सख्त होते जाएंगे. खास बात यह है कि पहले चरण में लागू किए गए उपाय अगले चरण में भी जारी रहते हैं और उनके ऊपर नई पाबंदियां जुड़ती जाती हैं.
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