बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. इस चुनाव के लिए देश भर में 5708 मतदाता हैं. यदि जरूरी हुआ तो 20 जनवरी 2026 को मतदान होगा. बीजेपी की परंपरा के अनुसार अध्यक्ष का चुनाव आमराय से होता आया है. ऐसे में नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है, लेकिन इस बार चुनाव में एक खास बात है कि 1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है जब पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से शामिल लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी बीजेपी अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हैं.
निर्वाचन मंडल में शामिल होते हैं ये सदस्य
दरअसल, निर्वाचन मंडल के गठन के लिए बीजेपी संविधान के अनुसार सबसे पहले बूथ स्तर, फिर मंडल, जिला और अंत में प्रदेश स्तर के अध्यक्षों का चुनाव होता है. इन चुनावों के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल तैयार होता है. इस निर्वाचन मंडल में राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं. प्रदेश संगठन के चुनाव में परिषद के सदस्यों का चुनाव कराया जाता है.
बीजेपी के संगठन पर्व में देश भर की प्रदेश इकाइयों में चुनाव हो रहे हैं. पार्टी संविधान के अनुसार कम से कम पचास प्रतिशत राज्यों में संगठन चुनाव होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाता है. यह पैमाना पूरा हो चुका है लेकिन अब भी कुछ राज्यों में चुनाव होना बाकी हैं. इनमें कर्नाटक, हरियाणा, त्रिपुरा और दिल्ली शामिल हैं.
बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में आडवाणी और जोशी हैं शामिल
महत्वपूर्ण बात यह है कि लाल कृष्ण आडवाणी लंबे समय तक गांधीनगर से सांसद होने के नाते गुजरात से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित होते आए थे. 2021 में वे दिल्ली से परिषद के सदस्य हैं. इसी तरह मुरली मनोहर जोशी भी कानपुर से सांसद होने के नाते उत्तर प्रदेश से परिषद के सदस्य थे. बाद में सांसद न होने पर वे दिल्ली से परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए थे. लेकिन अभी तक दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनाव संपन्न नहीं हुए हैं. इसलिए दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित नहीं हो सके हैं. ऐसे हालात में आडवाणी और जोशी दोनों ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हो सके हैं. गौरतलब है कि इन दोनों ही शीर्ष नेताओं को बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया है.
(हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट)